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चार माह से अंधेरे में डूबा सांसद आदर्श गांव बाछम
भक्त दर्शन पांडेय /अमर उजाला, बागेश्वर।
Updated Fri, 27 Oct 2017 10:28 PM IST
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बाछम गांव।
- फोटो : amar ujala
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प्रधानमंत्री की आदर्श गांव योजना के तहत चयनित सांसद आदर्श गांव बाछम चार माह से अंधेरे में डूबा है। बिजली नहीं आने से यहां के लोग रिंगाल के छिलकों की रोशनी से रात्रि प्रकाश करने को मजबूर हैं। बिजली नहीं होने से लोगों को संचार सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। आदर्श गांव में बैंक तो दूर एक पोस्टआफिस तक नहीं है। हाइस्कूल की पढ़ाई के लिए भी बच्चों को 10 से 15 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है।
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बागेश्वर जिले के बेहद दुर्गम बाछम गांव को एक वर्ष पूर्व सांसद आदर्श गांव घोषित किया था। राज्यसभा के सदस्य प्रदीप टम्टा ने इस गांव को गोद लिया था। तब लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल, बैंक सहित जरूरी सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन सांसद द्वारा गोद लिए गांव की तस्वीर सालभर बाद भी नहीं बदली है।
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गांव में और सुविधाएं तो दूर यहां की बिजली तक चार माह से गुल है। बिजली नहीं होने से ग्रामीणों को अंधेरे में रातें गुजारनी पड़ रही हैं। छह तोकों में विद्युतीकरण हुआ है जबकि तीन तोकों में अभी तक बिजली के तार तक नहीं खींचे गए हैं। ग्रामीणों को जरूरत के अनुसार केरोसिन उपलब्ध नहीं हो पाता है।
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ऐसे में ज्यादातर निर्धन परिवार रिंगाल के छिलकों से रात में उजाला करने को मजबूर हैं। बिजली नहीं होने से धूर नामक स्थान पर लगाया गया बीएसएनएल का मोबाइल टावर शोपीस बना रहता है। यहां के लोगों को कोई सूचना देने के लिए 48 किमी दूर कपकोट तहसील मुख्यालय जाना पड़ता है।
शिक्षा के नाम पर गांव में एक प्राथमिक पाठशाला और एक जूनियर हाइस्कूल है। हाइस्कूल व इंटर की शिक्षा के लिए यहां छात्र-छात्रा खाती या बदियाकोट जाते हैं। निर्धनता और अधिक दूरी के कारण गांव की छात्राएं आगे की शिक्षा नहीं ले पाती हैं। यही हाल बैंकिंग सहित अन्य सुविधाओं का भी है।
गांव में बैंक तो दूर पोस्टआफिस तक नहीं है। यहां के लोगों को पोस्टल सुविधाओं के लिए 10 किमी दूर खाती जाना पड़ रहा है। इससे वृद्ध, दिव्यांग, विधवा सहित अन्य पेंशनरों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य के नाम पर एकमात्र एएनएम सेंटर है। मामूली बीमारी में भी उपचार के लिए कपकोट जाना पड़ता है। ग्राम प्रधान रतन सिंह, शेर सिंह, दिगंबर, तारा सिंह आदि ने बताया कि आदर्श गांव जैसी कोई सुविधा उन्हें अभी तक नहीं मिली हैं।
जिला मुख्यालय से दूरी- 66 किमी
गावं की कुल जनसंख्या -1244
पुरुष- 625
महिला - 619
अनुसूचित जाति -218
बीपीएल परिवार- 114
आंगनबाड़ी केंद्र - 1
एएनएम केंद्र - 1
प्रापा - 1
जूहा - 1
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आदर्श गांव के लिए तय गाइड लाइन के अनुसार अभी कई चीजें अधूरी हैं। प्रस्तावित कार्यों को समय से पूरा करने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। आदर्श गांवों में प्रस्तावित योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अलग से बजट का प्रावधान होना चाहिए। केंद्र व राज्य सरकारों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। बाछम गांव में जल्दी बिजली सेवा बहाली के लिए शासन स्तर पर वार्ता की गई है।
- प्रदीप टम्टा, सांसद
- पिछले साल नवंबर से बाछम गांव में बिजली सप्लाई शुरू की थी। बिजली की लाइन सोराग गांव से आती है। सोराग के ग्रामीणों ने संयोजन नहीं लिए। उरेडा से वहां बिजली की सप्लाई होती है। मुफ्त में बिजली नहीं दी जा सकती। इसके कारण पूरे क्षेत्र की सप्लाई काटनी पड़ी।
- एसएस भंडारी, उपखंड अधिकारी, यूपीसीएल