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बागेश्वर, काफलीगैर और धरमघर के जंगल धधके
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बागेश्वर के झिरौली के जंगल में लगी आग को बुझाते वन विभाग के कर्मचारी। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिले में हर तरफ जंगल जल रहे हैं। जिला मुख्यालय से गरुड़, कांडा, काफलीगैर, दुग नाकुरी के जंगलों में रोजाना आग लग रही है। इससे जहां वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं लोगों को पर्यावरण प्रदूषण की परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। जिले में आग की 55 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें 70 हेक्टेयर से अधिक जंगल जल चुका है।
जिला मुख्यालय के नीलेश्वर मंदिर की पहाड़ी में शनिवार रात शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। रात के समय हवा के संपर्क में आने से आग तेजी से फैलने लगी। सूचना के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने आग पर काबू पाया। काफलीगैर तहसील के झिरौली क्षेत्र में आग से वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। धरमघर रेंज के मजगांव क्षेत्र में भी जंगल की आग बेकाबू हो रही है। आग से स्थानीय पशुपालकों को चारे की परेशानी होने लगी है। वन्यजीवों को भी आग से नुकसान हो रहा है। हिंसक जानवर जंगल से भागकर गांवों में आने लगे हैं।
वनों में आग लगने से पर्यावरण प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। जिला मुख्यालय सहित घाटी वाले क्षेत्रों में धुआं फैलने से आंख और सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रहीं हैं। दमा और सांस के रोगियों को इससे परेशानी हो रही है। आग से तापमान में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिला मुख्यालय का अधिकतम तापमान 35 डिग्री से अधिक पहुंच गया है।
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इधर, डीएफओ हिमांशु बागरी ने कहा कि कर्मचारी आग रोकने की कोशिश लगातार कर रहे हैं। आग की घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद फायर वाचरों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। विभाग आग लगाने वालों पर भी नजर रहा है। वनाधिकारियों ने ग्रामीणों से भी जंगलों को बचाने के लिए सहयोग की अपील की है।
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जिला मुख्यालय के नीलेश्वर मंदिर की पहाड़ी में शनिवार रात शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। रात के समय हवा के संपर्क में आने से आग तेजी से फैलने लगी। सूचना के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने आग पर काबू पाया। काफलीगैर तहसील के झिरौली क्षेत्र में आग से वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। धरमघर रेंज के मजगांव क्षेत्र में भी जंगल की आग बेकाबू हो रही है। आग से स्थानीय पशुपालकों को चारे की परेशानी होने लगी है। वन्यजीवों को भी आग से नुकसान हो रहा है। हिंसक जानवर जंगल से भागकर गांवों में आने लगे हैं।
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वनों में आग लगने से पर्यावरण प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। जिला मुख्यालय सहित घाटी वाले क्षेत्रों में धुआं फैलने से आंख और सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रहीं हैं। दमा और सांस के रोगियों को इससे परेशानी हो रही है। आग से तापमान में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिला मुख्यालय का अधिकतम तापमान 35 डिग्री से अधिक पहुंच गया है।
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इधर, डीएफओ हिमांशु बागरी ने कहा कि कर्मचारी आग रोकने की कोशिश लगातार कर रहे हैं। आग की घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद फायर वाचरों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। विभाग आग लगाने वालों पर भी नजर रहा है। वनाधिकारियों ने ग्रामीणों से भी जंगलों को बचाने के लिए सहयोग की अपील की है।