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छोटी मोटी जांच के लिए बागेश्वर जाना बना लोगों की मजबूरी 

Thu, 20 Dec 2018 10:59 PM IST
Almora desk अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Published by: Almora desk Updated Thu, 20 Dec 2018 10:59 PM IST
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For the smallest check, people are forced to go to Bageshwar
ऐलोपैथिक चिकित्सालय खंतोली में रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण करती डाक्टर। - फोटो : अमर उजाला
 राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय खंतोली में सैंपलों जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को मल, मूत्र, खून आदि सैंपलों की जांच के लिए 35 किलोमीटर दूर बागेश्वर गांव आना पड़ता है। इस अस्पताल में एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की भी कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट तो तैनात है लेकिन आयुर्वेदिक डॉक्टर का पद पांच साल से रिक्त हैं।
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बृहस्पतिवार को सुबह अमर उजाला की टीम यहां पड़ताल के लिए पहुंची तो कई समस्याएं सामने आई। सबसे पहले 8: 40 बजे वार्ड ब्वाय अस्पताल में पहुंचे। इसके बाद 8: 45 बजे फामासिस्ट गिरीश वर्मा, 8:50 पर डॉ. डिंपल भाकुनी और आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट नेहा राणा 8 : 56 बजे अस्पता पहुंची। सवा नौ से रोगियों का आना शुरू हुआ। अस्पताल में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड कराने और जांच की सुविधा न होने से उपचार के लिए पहुंचे मरीज काफी परेशान आए। लोगों ने बताया कि मरीजों को एक्सरे व अल्ट्रासाउंड कराने, विभिन्न सैंपलों की जांच के लिए बागेश्वर जाना पड़ता है। जिसमें उनका पूरा दिन के साथ-साथ काफी रुपया बर्बाद हो जाता है। इस अस्पताल की स्थापना वर्ष 2004 में हो गई थी। खंतोली गांव के साथ ही पोखरी, कभाटा, खोलागांव, विजयपुर, ढपटी, शेरी और आगर गांव के ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधा के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। 
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चिकित्साकर्मियों को खुद करनी पड़ती है सफाई 
कांडा (बागेश्वर)। एलोपैथिक अस्पताल खंतोली में आयुर्वेदिक डॉक्टर, लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मी व पर्यावरण मित्र का पद खाली है। पर्यावरण मित्र न होने से चिकित्साकर्मियों को खुद सफाई करनी पड़ती है। 
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-दिव्यांग के लिए नहीं बना है रैंप 
कांडा (बागेश्वर) अस्पताल के कक्षों में जाने हेतु दिव्यांगों के लिए रेंप नहीं बना है। इससे इससे दिव्यांगों को चिकित्सा कक्षों में आने जाने में कई दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। 

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हल्की बरसात में टपकनी शुरू जाती है छत  
कांडा (बागेश्वर)। राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय खंतोली के भवन की पिछले वर्ष 4.50 लाख रुपये से मरम्मत हुई थी। लेकिन इसकी छत हल्की बरसात में टपकनी शुरू हो जाती है।  

कोट....
अस्पताल में कई समस्याएं हैं। जिला स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए डीएम और शासन स्तर की समस्याओं के लिए मुख्यमंत्री से बात करूंगा। 
बलवंत भौर्याल, विधायक विधानसभा क्षेत्र कपकोट। 
 
राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय की समस्याओं के समाधान के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। 
डा. जेसी मंडल मुख्य चिकित्साधिकारी बागेश्वर।  
 
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