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नौकरी देने के नाम पर ठगी करने वाले को पांच साल की सजा
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
Updated Fri, 09 Feb 2018 11:08 PM IST
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Supreme Court
- फोटो : demo pic
स्वास्थ्य विभाग में नौकरी लगाने के नाम पर युवाओं से रुपये लेने और उप सचिव के फर्जी हस्ताक्षर युक्त नियुक्ति पत्र देने के आरोपी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राकेश कुमार सिंह ने पांच वर्ष के कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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मामले के अनुसार 2015 में कपकोट तहसील के चलकाना निवासी धीरज गढ़िया ने लोगों को स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर एक होटल में बुलाया। इसके बाद लोगों से मोटी रकम लेकर उन्हें उप सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के फर्जी हस्ताक्षर वाले नियुक्ति पत्र दे दिए। मामले में संदेह होने पर गरुड़ निवासी अशोक कुमार ने बागेश्वर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई।
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इसके बाद मामले की विवेचना एसआई सच्चिदानंद और मोहन चंद्र पलड़िया ने की। इसके बाद आरोपी के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। सरकार की ओर से ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी भूपेंद्र सिंह जंगपांगी और सहायक अभियोजन अधिकारी ललित मोहन आर्य ने पैरवी की। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राकेश कुमार सिंह ने अभियुक्त धीरज गड़िया को पांच साल के कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। बागेश्वर कोतवाली के पेशकार जितेंद्र तिवारी ने मामले में प्रभावी पैरवी की।
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