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किसानों को जड़ी-बूटी की खेती की उपयोगिता बताई
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Wed, 16 Aug 2017 11:27 PM IST
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सूपी गांव में काश्तकारों को औषधीय पौधे वितरित करते विशेषज्ञ।
- फोटो : अमर उजाला
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गढ़वाल केंद्रीय विश्व विद्यालय के उच्च शिखरीय पादप शोध केंद्र (हैप्रेक) संस्थान की ओर से नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज परियोजना के तहत जड़ी-बूटी पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। स्वतंत्रता सेनानी जीआइसी सूपी में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों और ग्रामीणों को जड़ी-बूटियों के बारे में जानकारी दी गई।
किसानों में औषधीय पौधों का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में जड़ी-बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर के वैज्ञानिक डॉ. विजय भट्ट और संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विजयकांत पुरोहित, डॉ. बीएस मैंगवाल ने छात्र-छात्राओं को जड़ी-बूटी के महत्व और भविष्य में इसके कृषिकरण से होने वाले लाभ की जानकारी दी।
इस अवसर पर झूनी, खलझूनी, सूपी सहित दूरस्थ गांवों से आए लगभग 250 किसानाें को जटामासी, तेजपात, रीठा, अतीस, कुटकी, आमीस, बड़ी इलायची, जामुन सहित तीन हजार से अधिक विभिन्न प्रजाति के पौधे वितरित किए गए। कार्यक्रम में रेंजर शशि देव, किसान भूपाल सिंह, भागीचंद, कुंदन सिंह, गोपाल सिंह गड़िया सहित कई किसान उपस्थित थे।
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किसानों में औषधीय पौधों का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में जड़ी-बूटी शोध संस्थान गोपेश्वर के वैज्ञानिक डॉ. विजय भट्ट और संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विजयकांत पुरोहित, डॉ. बीएस मैंगवाल ने छात्र-छात्राओं को जड़ी-बूटी के महत्व और भविष्य में इसके कृषिकरण से होने वाले लाभ की जानकारी दी।
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इस अवसर पर झूनी, खलझूनी, सूपी सहित दूरस्थ गांवों से आए लगभग 250 किसानाें को जटामासी, तेजपात, रीठा, अतीस, कुटकी, आमीस, बड़ी इलायची, जामुन सहित तीन हजार से अधिक विभिन्न प्रजाति के पौधे वितरित किए गए। कार्यक्रम में रेंजर शशि देव, किसान भूपाल सिंह, भागीचंद, कुंदन सिंह, गोपाल सिंह गड़िया सहित कई किसान उपस्थित थे।
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