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15 बरस बाद भी सड़क से नहीं जुड़ सका शहीद रमेश परिहार का गांव
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Mon, 05 Sep 2016 10:59 PM IST
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गांव का दृश्य
- फोटो : अमर उजाला
केंद्र और राज्य सरकारों ने कारगिल के अमर शहीदों के गांवों के विकास की कई घोषणाएं की थी। लेकिन सच तो यह है कि 15 बरस बाद भी डुंगर गांव निवासी कारगिल शहीद रमेश सिंह परिहार का गांव आज तक सड़क से नहीं जुड़ सका है। गांव में सड़क के साथ ही कई अन्य समस्याएं बनी हुई हैं। गुस्साएं ग्रामीणों ने आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों को झटका देने का मन बना लिया है।
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जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ग्राम पंचायत नैल की जनसंख्या करीब 500 हैं। यहां 359 मतदाता है। ग्राम पंचायत में 130 परिवार रहते हैं। इसी ग्राम पंचायत के डुंगर गांव तोक में देश के सपूत कारगिल के अमर शहीद रमेश सिंह परिहार जन्मे थे। कारगिल युद्ध के दौरान वह सरहद पर दुश्मनों का सामना करते हुए शहीद हो गए थे।
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ग्रामीणों को विश्वास था कि सरकार अपनी घोषणा के अनुसार कुछ भी नहीं तो गांव को सड़क से ही जोड़ देगी, लेकिन 15 साल बाद भी उनकी यह हसरत पूरी नहीं हो सकी है। मजबे तोक निवासी सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी दत्त जोशी ने बताया कि रूनीखेत से अमतौड़ा गांव तक आठ किमी सड़क बन चुकी हैै। जबकि अमसरकोट गिरेछीना सड़क से सात रतबे गांव की ओर सड़क बन गई ह,ै लेकिन शहीद परिहार के गांव को सड़क से वंचित कर दिया गया है। सड़क के लिए कई बार लिखा पढ़ी कर दी है लेकिन समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।
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