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यूपीसीएल के कारनामे:पोल के स्थान पर पेड़ों से बांध दिए गए करंट दौड़ते तार
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खतरा:बागेश्वर के जुलकिया में पेड़ों से बंधे बिजली के तार। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। बागेश्वर के जुलकिया में बिजली के तारों को पेड़ों से बांध दिया गया है। पोल लगाने से बचने के लिए किए गए इस खेल के कारण करंट फैलने का खतरा है। लोगों में यूपीसीएल की कारगुजारी को लेकर रोष है।
बागेश्वर नगर से सटे नदीगांव के जंगल जुलकिया में बिजली के करंट दौड़ते तार पोलों के स्थान पर पेड़ों से बांधे गए हैं। जंगल में पेड़ों से होकर बिजली की लाइन गुजरती है। पेड़ों से तारों को बांधा गया है। पेड़ों से करंट दौड़ते तारों को सपोर्ट दिया गया है।
पेड़ों से करंट दौड़ते तार बांधने से जंगल से जानवरों के लिए चारा लाने वाली महिलाओं के साथ ही अन्य लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। लोगों को करंट लगने का भय सता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों से पेड़ों से करंट दौड़ते तार हटाने के लिए कहा जा चुका है, लेकिन अधिकारी नहीं सुन रहे हैं। लोगों का कहना है कि बिजली के तारों से किसी प्रकार का नुकसान होता है तो इसके लिए विभाग जिम्मेदार रहेगा।
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वन विभाग भी उठा चुका है आवाज
बागेश्वर। इस फायर सीजन में वन विभाग ने भी बिजली के तार पेड़ों से बंधे होने और पेड़ों से झूलने पर सवाल खड़े किए थे। विभाग का कहना था कि झूलते तारों से निकलने वाली चिंगारी जंगलों में आग लगने का कारण बन रही है।
कोट
जुलकिया में पेड़ों से तार बांधने का मामला संज्ञान में नहीं है। मौका मुआयना किया जाएगा। पेड़ों पर तार बंधे होंगे तो हटवाए जाएंगे।
मो. अफजाल ईई यूपीसीएल बागेश्वर
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बागेश्वर नगर से सटे नदीगांव के जंगल जुलकिया में बिजली के करंट दौड़ते तार पोलों के स्थान पर पेड़ों से बांधे गए हैं। जंगल में पेड़ों से होकर बिजली की लाइन गुजरती है। पेड़ों से तारों को बांधा गया है। पेड़ों से करंट दौड़ते तारों को सपोर्ट दिया गया है।
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पेड़ों से करंट दौड़ते तार बांधने से जंगल से जानवरों के लिए चारा लाने वाली महिलाओं के साथ ही अन्य लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। लोगों को करंट लगने का भय सता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार विभागीय अधिकारियों से पेड़ों से करंट दौड़ते तार हटाने के लिए कहा जा चुका है, लेकिन अधिकारी नहीं सुन रहे हैं। लोगों का कहना है कि बिजली के तारों से किसी प्रकार का नुकसान होता है तो इसके लिए विभाग जिम्मेदार रहेगा।
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वन विभाग भी उठा चुका है आवाज
बागेश्वर। इस फायर सीजन में वन विभाग ने भी बिजली के तार पेड़ों से बंधे होने और पेड़ों से झूलने पर सवाल खड़े किए थे। विभाग का कहना था कि झूलते तारों से निकलने वाली चिंगारी जंगलों में आग लगने का कारण बन रही है।
कोट
जुलकिया में पेड़ों से तार बांधने का मामला संज्ञान में नहीं है। मौका मुआयना किया जाएगा। पेड़ों पर तार बंधे होंगे तो हटवाए जाएंगे।
मो. अफजाल ईई यूपीसीएल बागेश्वर