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आप की दस्तक ने बढ़ाई चनावी फिजा में हलचल
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Election of MLA in Bageshwar
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कालिका रावल
बागेश्वर। राज्य गठन के बाद से राज्य विधानसभा के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस का दबदबा रहा है। बसपा का हाथी पहाड़ तो कभी नहीं चढ़ पाया लेकिन कई सीटों में त्रिकोणीय मुकाबला अवश्य बनाया। इस बार अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की दस्तक से चुनावी फिजा में हलचल बढ़ी है। बागेश्वर और कपकोट सीट से पिछला चुनाव बसपा से लड़े दोनों प्रत्याशी इस बार आप के हो गए हैं। दोनों को आप में अहम जिम्मेदारी भी दी गई है। बसपा, यूकेडी की सक्रियता अब तक सामने नहीं आई है।
राज्य गठन के बाद से जिले की दोनों सीटों पर भाजपा, कांग्रेस का दबदबा रहा है। पक्ष, विपक्ष में यही दल रहे हैं। राज्य बनने के बाद बागेश्वर सीट में वर्ष 2002 में ही कांग्रेस को सफलता मिली। तब राम प्रसाद टम्टा विधायक चुने गए थे और एनडी तिवारी सरकार में मंत्री बने थे। वर्ष 2007 से भाजपा के चंदन राम दास लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। हालांकि इस बार उन्हें कई मोर्चों में जूझना पड़ेगा।
कपकोट सीट से वर्ष 2002, 2007 में भगत सिंह कोश्यारी चुनाव जीते। वर्ष 2009 में वह राज्यसभा सदस्य चुने गए। उप चुनाव में भाजपा के शेर सिंह गढ़िया को कपकोट के लोगों ने विधानसभा भेजा। 2012 में कांग्रेस ने यह सीट भाजपा से छीनी, ललित फर्स्वाण विधायक बने। 2017 में भाजपा के बलवंत सिंह भौर्याल कपकोट से विधायक बने।
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बागेश्वर और कपकोट सीट में पिछले चुनाव में बसपा भी अच्छा प्रदर्शन करने में कामयाब रही थी। बागेश्वर सीट से बसपा के बसंत कुमार और कपकोट सीट से भूपेश उपाध्याय तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार दोनों आप में शामिल हो गए हैं।
आप ने उपाध्याय को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तो बसंत कुमार को प्रदेश उपाध्यक्ष का दायित्व दिया है। दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं। दोनों को टिकट मिलना भी तय है। आप के सीएम पद के चेहरे अजय कोठियाल दोनों के नाम की घोषणा सार्वजनिक तौर पर कर चुके हैं। भाजपा, कांग्रेस को आप कितनी टक्कर दे पाती है, यह आने वाला समय बताएगा। संवाद
कांग्रेस, भाजपा, बसपा की परिक्रमा कर चुके भूपेश
बागेश्वर। कपकोट सीट से आप के दावेदार भूपेश उपाध्याय कांग्रेस, भाजपा, बसपा की परिक्रमा करते हुए आप तक पहुंचे हैं। वह कांग्रेस में रहते हुए वर्ष 2012 में विजय बहुगुणा की सरकार के दौर में दर्जा राज्यमंत्री रहे। बहुगुणा भाजपा में गए तो उपाध्याय भी भाजपा में शामिल हो गए। वर्ष 2017 के चुनाव में वह बसपा में शामिल हो गए। अब आप में हैं।
बागेश्वर, कपकोट सीट के पिछले चुनाव के आंकड़े
बागेश्वर। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बागेश्वर सीट से भाजपा के चंदन राम दास 33792 मत लेकर विजयी रहे थे। कांग्रेस के बालकृष्ण को 19225 मतों पर संतोष करना पड़ा था। बसपा के बसंत कुमार 11038 मत लाए थे। यूकेडी के जीवन लाल को 1207 और निर्दलीय बची लाल को 676 मत मिले थे। बात वर्ष 2012 की करें तो भाजपा के चंदन राम दास 23396 मत लेकर विजयी रहे थे। कांग्रेस के राम प्रसाद टम्टा को 21485 मत मिले थे। यानी कि 2017 के चुनाव में कांग्रेस का मत प्रतिशत घट गया। सभी दलों से नाराज 1541 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था।
कपकोट सीट के पिछले चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा के बलवंत सिंह भौर्याल 27213 मत लेकर विजयी रहे थे। कांग्रेस के ललित फर्स्वाण को 21231 मत मिले थे। बसपा के भूपेश उपाध्याय को 6964, निर्दलीय भगत डसीला 1242, यूकेडी के राम सिंह ऐठानी को 951, निर्दलीय दयाल कपकोटी को 641, गोविंद लाल को 220, करम सिंह दानू को 196 मत मिले थे। 1116 लोगों ने नोटा का बटन दबाया था। कपकोट सीट पर वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस के ललित फर्स्वाण 22335 मत लेकर विजयी रहे थे। भाजपा के बलंवत सिंह भौर्याल को 20966 मत मिले थे।
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बागेश्वर। राज्य गठन के बाद से राज्य विधानसभा के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस का दबदबा रहा है। बसपा का हाथी पहाड़ तो कभी नहीं चढ़ पाया लेकिन कई सीटों में त्रिकोणीय मुकाबला अवश्य बनाया। इस बार अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की दस्तक से चुनावी फिजा में हलचल बढ़ी है। बागेश्वर और कपकोट सीट से पिछला चुनाव बसपा से लड़े दोनों प्रत्याशी इस बार आप के हो गए हैं। दोनों को आप में अहम जिम्मेदारी भी दी गई है। बसपा, यूकेडी की सक्रियता अब तक सामने नहीं आई है।
राज्य गठन के बाद से जिले की दोनों सीटों पर भाजपा, कांग्रेस का दबदबा रहा है। पक्ष, विपक्ष में यही दल रहे हैं। राज्य बनने के बाद बागेश्वर सीट में वर्ष 2002 में ही कांग्रेस को सफलता मिली। तब राम प्रसाद टम्टा विधायक चुने गए थे और एनडी तिवारी सरकार में मंत्री बने थे। वर्ष 2007 से भाजपा के चंदन राम दास लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। हालांकि इस बार उन्हें कई मोर्चों में जूझना पड़ेगा।
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कपकोट सीट से वर्ष 2002, 2007 में भगत सिंह कोश्यारी चुनाव जीते। वर्ष 2009 में वह राज्यसभा सदस्य चुने गए। उप चुनाव में भाजपा के शेर सिंह गढ़िया को कपकोट के लोगों ने विधानसभा भेजा। 2012 में कांग्रेस ने यह सीट भाजपा से छीनी, ललित फर्स्वाण विधायक बने। 2017 में भाजपा के बलवंत सिंह भौर्याल कपकोट से विधायक बने।
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बागेश्वर और कपकोट सीट में पिछले चुनाव में बसपा भी अच्छा प्रदर्शन करने में कामयाब रही थी। बागेश्वर सीट से बसपा के बसंत कुमार और कपकोट सीट से भूपेश उपाध्याय तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार दोनों आप में शामिल हो गए हैं।
आप ने उपाध्याय को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तो बसंत कुमार को प्रदेश उपाध्यक्ष का दायित्व दिया है। दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हैं। दोनों को टिकट मिलना भी तय है। आप के सीएम पद के चेहरे अजय कोठियाल दोनों के नाम की घोषणा सार्वजनिक तौर पर कर चुके हैं। भाजपा, कांग्रेस को आप कितनी टक्कर दे पाती है, यह आने वाला समय बताएगा। संवाद
कांग्रेस, भाजपा, बसपा की परिक्रमा कर चुके भूपेश
बागेश्वर। कपकोट सीट से आप के दावेदार भूपेश उपाध्याय कांग्रेस, भाजपा, बसपा की परिक्रमा करते हुए आप तक पहुंचे हैं। वह कांग्रेस में रहते हुए वर्ष 2012 में विजय बहुगुणा की सरकार के दौर में दर्जा राज्यमंत्री रहे। बहुगुणा भाजपा में गए तो उपाध्याय भी भाजपा में शामिल हो गए। वर्ष 2017 के चुनाव में वह बसपा में शामिल हो गए। अब आप में हैं।
बागेश्वर, कपकोट सीट के पिछले चुनाव के आंकड़े
बागेश्वर। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बागेश्वर सीट से भाजपा के चंदन राम दास 33792 मत लेकर विजयी रहे थे। कांग्रेस के बालकृष्ण को 19225 मतों पर संतोष करना पड़ा था। बसपा के बसंत कुमार 11038 मत लाए थे। यूकेडी के जीवन लाल को 1207 और निर्दलीय बची लाल को 676 मत मिले थे। बात वर्ष 2012 की करें तो भाजपा के चंदन राम दास 23396 मत लेकर विजयी रहे थे। कांग्रेस के राम प्रसाद टम्टा को 21485 मत मिले थे। यानी कि 2017 के चुनाव में कांग्रेस का मत प्रतिशत घट गया। सभी दलों से नाराज 1541 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था।
कपकोट सीट के पिछले चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा के बलवंत सिंह भौर्याल 27213 मत लेकर विजयी रहे थे। कांग्रेस के ललित फर्स्वाण को 21231 मत मिले थे। बसपा के भूपेश उपाध्याय को 6964, निर्दलीय भगत डसीला 1242, यूकेडी के राम सिंह ऐठानी को 951, निर्दलीय दयाल कपकोटी को 641, गोविंद लाल को 220, करम सिंह दानू को 196 मत मिले थे। 1116 लोगों ने नोटा का बटन दबाया था। कपकोट सीट पर वर्ष 2012 के चुनाव में कांग्रेस के ललित फर्स्वाण 22335 मत लेकर विजयी रहे थे। भाजपा के बलंवत सिंह भौर्याल को 20966 मत मिले थे।