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शराब से प्राप्त राजस्व आय देव भूमि के विकास में खर्च करना मातृ शक्ति का अपमान है: भंडारी
अमर उजाला ब्यूरो, गरुड़ (बागेश्वर)
Updated Sun, 09 Apr 2017 11:36 PM IST
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शराब विराधी आंदोलन की नेत्री नंदी भंडारी।
- फोटो : अमर उजाला
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कत्यूर घाटी की शराब विरोधी आंदोलन की प्रमुख नेत्री और कनाड़ा सरकार से विशिष्ट पंचायत प्रतिनिधि पुरस्कार से सम्मानित नंदी भंडारी का कहना है कि शराब से प्राप्त राजस्व से देव भूमि का विकास करना पहाड़ की मातृ शक्ति और देव भूमि का अपमान है।
उन्होंने पीएम मोदी से राज्य के विकास के लिए अतिरिक्त पैकेज देने की मांग की है। शराब विरोधी आंदोलन की प्रमुख नेत्री नंदी भडांरी ने 2002 में कंधार (डंगोली) से शराब की दुकान हटाने के लिए कंधार में दो माह तक आंदोलन किया था।
तब भंडारी, संतोष तिवारी सहित गलई गांव की 15 महिलाओं को प्रशासन जेल की सलाखों के अंदर कर दिया था। आंदोलन उग्र होता देख जिला प्रशासन कंधार बाजार से शराब की दुकान हटा कर उसे ग्वालदम मोटर मार्ग में शिफ्ट करने को मजबूर हुई।
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भंडारी ने पीएम मोदी को भेजे पत्र मेें कहा है कि शराब बिक्री का धन देव भूमि में विकास कार्यों पर खर्च करने से देव भूमि कलंकित हो जाएगी। उन्होंने पीएम से राज्य के विकास के लिए अतिरिक्त पैकेज देने को कहा है।
भंडारी का कहना है कि पहाड़ की महिला राज्य में शराब बंदी की पूर्ण पक्षधर है। वह शराब के धन से अपने गांव का विकास नहीं चाहती है। शराब बंदी के लिए इस बीच हर गांव की महिलाएं आंदोलित है। उनका कहना है कि शराब के बढ़ते प्रचलन से युवा शक्ति पर बुरा असर पड़ रहा है।
कई घर शराब से बर्बाद हो गए हैं। कहा कि बागेश्वर के विधायक चंदन दास ने चुनाव के दौरान चुनावी सभाओं में स्पष्ट घोषणा की थी कि चुनाव जीतने के बाद बागेश्वर जिले को मद्य निषेध घोषित करेंगे, लेकिन अब विधायक शराब बंदी के मामले में चुप्पी साधे है।
जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि शासन-प्रशासन की शह पर शराब के व्यापारी ने सबसे पहले कंधार में शराब की दुकान खोलकर जन भावनाओं का अपमान किया। उन्होंने बताया कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार की कैबिनेट ने शराब की दुकानें खोलने के चक्कर में कई स्टेट हाईवे का नाम बदलकर उन्हें जिला मार्ग घोषित कर राज्य की जनता को उल्लू बनाने का काम किया है। उन्होंने सरकार शराब माफियों के इशारे पर चलाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने पीएम मोदी से राज्य के विकास के लिए अतिरिक्त पैकेज देने की मांग की है। शराब विरोधी आंदोलन की प्रमुख नेत्री नंदी भडांरी ने 2002 में कंधार (डंगोली) से शराब की दुकान हटाने के लिए कंधार में दो माह तक आंदोलन किया था।
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तब भंडारी, संतोष तिवारी सहित गलई गांव की 15 महिलाओं को प्रशासन जेल की सलाखों के अंदर कर दिया था। आंदोलन उग्र होता देख जिला प्रशासन कंधार बाजार से शराब की दुकान हटा कर उसे ग्वालदम मोटर मार्ग में शिफ्ट करने को मजबूर हुई।
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भंडारी ने पीएम मोदी को भेजे पत्र मेें कहा है कि शराब बिक्री का धन देव भूमि में विकास कार्यों पर खर्च करने से देव भूमि कलंकित हो जाएगी। उन्होंने पीएम से राज्य के विकास के लिए अतिरिक्त पैकेज देने को कहा है।
भंडारी का कहना है कि पहाड़ की महिला राज्य में शराब बंदी की पूर्ण पक्षधर है। वह शराब के धन से अपने गांव का विकास नहीं चाहती है। शराब बंदी के लिए इस बीच हर गांव की महिलाएं आंदोलित है। उनका कहना है कि शराब के बढ़ते प्रचलन से युवा शक्ति पर बुरा असर पड़ रहा है।
कई घर शराब से बर्बाद हो गए हैं। कहा कि बागेश्वर के विधायक चंदन दास ने चुनाव के दौरान चुनावी सभाओं में स्पष्ट घोषणा की थी कि चुनाव जीतने के बाद बागेश्वर जिले को मद्य निषेध घोषित करेंगे, लेकिन अब विधायक शराब बंदी के मामले में चुप्पी साधे है।
जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि शासन-प्रशासन की शह पर शराब के व्यापारी ने सबसे पहले कंधार में शराब की दुकान खोलकर जन भावनाओं का अपमान किया। उन्होंने बताया कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार की कैबिनेट ने शराब की दुकानें खोलने के चक्कर में कई स्टेट हाईवे का नाम बदलकर उन्हें जिला मार्ग घोषित कर राज्य की जनता को उल्लू बनाने का काम किया है। उन्होंने सरकार शराब माफियों के इशारे पर चलाने का आरोप लगाया है।