फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   District Consumer Forum decision

जिला उपभोक्ता फोरम का फैसला

Mon, 22 Jun 2015 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर
ब्यूरो/अमर उजाला, बागेश्वर Updated Mon, 22 Jun 2015 12:02 AM IST
विज्ञापन

जिला उपभोक्ता विवाद परितोष फोरम ने एक रोगी बच्चे के पिता की ओर से निजी अस्पताल के लिए खिलाफ दायर किए गए मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया है।

विज्ञापन


इस मामले में बच्चे की टूटी हुई हड्डी जुड़ नहीं सकी, और बड़े अस्पतालों ने भी हाथ खड़े कर दिए। फोरम का मानना है कि इलाज सफल नहीं होना  इलाज संबंधी लापरवाही नहीं माना जा सकता है। इसमें अस्पताल दोषी नहीं है।
विज्ञापन


जौलकांडे निवासी खीमानंद बलसूनी के पुत्र गिरीश बलसूनी का हाथ फ्रैक्चर हो गया था। 24 जून 2013 को वह गिरीश को इलाज के लिए बागेश्वर स्थित केएस जंगपांगी के निजी अस्पताल में लाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


यहां पहले कच्चा और फिर पक्का प्लास्टर बांधा गया। तीन अगस्त को प्लास्टर खोला गया, लेकिन हाथ जुड़ा नहीं था। खीमानंद के अनुसार डाक्टर ने उन्हें अन्यत्र जाने की सलाह दी।

इसके लिए अस्पताल का नाम नहीं बताया, रेफर करने के लिए किसी प्रकार के कागजात भी नहीं दिए। वह हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल और एक निजी अस्पताल में बच्चे को ले गए। वहां इलाज के लिए मना कर दिया गया।

 इसके बाद वापस आकर वह सीएमओ से मिले। सरकार के बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सीएमओ ने बच्चे को देहरादून के मैक्स अस्पताल में रेफर किया।

वहां डाक्टरों ने कहा कि बच्चे की उम्र कम होने के कारण अभी हाथ की हड्डी का इलाज नहीं हो सकता। एक साल बाद ही इलाज हो सकेगा। उन्हें एक साल बाद आने की सलाह दी गई। इसके बाद 22 अगस्त 2013 को वह घर आ गए।

 इसके कुछ समय बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता फोरम में मामला दायर किया। खीमानंद का कहना है कि डाक्टर के गलत इलाज के कारण उनके बच्चे का हाथ खराब हो गया है। इलाज के लिए उन्हें बहुत स्थानों पर भटकना पड़ा।


 उन्होंने अस्पताल से क्षति पूर्ति के रूप में  दो लाख रुपए दिलाने की अपील की। इस लंबित केस की सुनवाई 20 जून हो हुई। सात पृष्ठों के फैसले में फोरम के अध्यक्ष जिला जज डा. जीके शर्मा, सदस्य संजय लोहनी, मीना फर्त्याल ने कहा है कि इस मामले में डाक्टरों की लापरवाही नहीं है।

डाक्टर पूरी कोशिश के बाद भी सही तरीके से रोग की पहचान और इलाज नहीं कर पाता तो इसे पेशे के प्रति उसकी लापरवाही नहीं माना जा सकता। याची को यह सिद्ध करना जरूरी है कि डाक्टर इस इलाज को कर पाने में सक्षम था, लेकिन ऐसा नहीं किया। न्यायालय मेें याची ने मात्र तथ्य पेश किए, कोई साक्ष्य पेश नहीं किया।

हाथ को देखने वाले अन्य डाक्टरों ने भी विपक्षी डाक्टर की ओर से लापरवाही होने की बात नहीं कही है। इसी आधार पर फोरम ने याचिका को खारिज कर दिया।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed