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Bageshwar News: गढ़-कुमो संस्कृति का संगम है दाबू गांव

Wed, 30 Aug 2023 12:10 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Wed, 30 Aug 2023 12:10 AM IST
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Dabu village is the confluence of Garh-Kumo culture
बागेश्वर। कुमाऊं और गढ़वाल की सीमा पर बसे दाबू गांव में दो संस्कृतियों का संगम देखने को मिलता है। कुमाऊं का गांव होने के बावजूद यहां के लोगों की बोली में गढ़वाली लहजा सुनने को मिलता है। गांव के लोगों का व्यापारिक केंद्र चमोली जिले का ग्वालदम बाजार है तो ग्रामीणों के पशु भी चुगान के लिए गढ़वाल में पड़ने वाले जंगलों में जाते हैं।
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दाबू गांव में अुनसूचित जाति के परिवार निवास रहते हैं। गरुड़ विकासखंड के अंतिम छोर पर बसे गांव की पहाड़ी को पार करते ही गढ़वाल की सीमा शुरू हो जाती है। एक ओर जहां गांव के लोग तहसील, ब्लॉक के काम से गरुड़ आते हैं, वहीं दूसरी ओर गांव में पैदा होने वाले आलू की बिक्री के लिए ग्वालदम बाजार जाते हैं। आमतौर पर ग्रामीण कुमाऊंनी में बात करते हैं, लेकिन उनकी यह बोली जिले के अन्य गावों से काफी अलग है। उनकी बोली में गढ़वाली लहजा सुनाई देता है।
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दाबू गांव निवासी हीरा राम का कहना है कि हमारे गांव की सीमा खत्म होते ही गढ़वाल शुरू हो जाता है। गांव की अधिक रिश्तेदारी भी गढ़वाल में है। दाबू में कुमाऊं से अधिक बहुएं गढ़वाल से हैं। आपसी रिश्तेदारी बढ़ने का असर बोली और त्योहारों पर भी पड़ता है। गांव में दोनों बोली बोलने वाले लोग आसानी से मिल जाते हैं।
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दाबू गांव निवासी पूरन राम का कहना है कि



दाबू गांव कुमाऊं और गढ़वाल के बीच व्यापार का भी केंद्र है। गांव में आलू की पैदावार अच्छी होती है। यहां पैदा होने वाला आलू न सिर्फ गरुड़ क्षेत्र बल्कि गढ़वाल के ग्वालदम भी जाता है। अधिकांश लोग ग्वालदम आलू भेजते हैं। गांव से वहां तक खच्चर से आलू पहुंचाया जाता है।




रोटी-बेटी का भी संबंध है गढ़वाल से

बागेश्वर। दाबू गांव के अधिकांश परिवारों के शादी-विवाह के संबंध गढ़वाल से होते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सीमा पर बसा गांव होने के चलते लोग अक्सर चमोली जिले के सीमांत गांवों से मिलकर रहते हैं। ऐसे में गांव के अधिकांश लोगों के शादी-विवाह संबंध भी गढ़वाल से होते आए हैं। वर्षों से होते आ रहे इन संबंधों के चलते गांव की संस्कृति और बोली पर गढ़वाली का असर लाजिमी है।
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