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गांवों में अब भी च्यूड़े कूटने का रिवाज कायम

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 15 Nov 2020 10:20 PM IST
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Chyurhe in Bageshwar
बागेश्वर के ग्वाड़ पजेणा गांव में च्यूड़े के लिए धान कूटती महिलाएं। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। पहाड़ में भैयादूज के लिए प्राचीन समय से ही धान के च्यूड़े बनाने का रिवाज रहा है। नगरीय क्षेत्रों में अब यह परंपरा समाप्ति की ओर है। इस कारण नगरीय क्षेत्रों में लोग बाजार में बिकने वाले च्यूड़े से काम चला लेते हैं लेकिन गांवों के लोगों ने रविवार को च्यूड़े बनाने के लिए धान कूटे। च्यूड़े बनाने के लिए धान को पहले से भिगोकर रख लिया जाता है। भैयादूज से एक दिन पहले धान ओखल में कूटे जाते हैं और फिर च्यूड़े को भूना जाता है। इसी च्यूड़े से भैयादूज पर्व पर बहनें भाइयों का सिर पूजन करती हैं। च्यूड़े में अखरोट, मीठा डालकर लंबे समय तक खाया जाता है। बाहर रहने वाले रिश्तेदारों को च्यूड़े भेजे जाते है। गांवों में आज भी इस प्राचीन परंपरा को देखना सुखद एहसास कराता है। शहरी आवरण ओढ़ चुके पहाड़ के अन्य लोगों को भी इस परंपरा को सहेजने के लिए आगे आने होगा।
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