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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Both sides of the BJP, who are safe in Bageshwar, despite the haystack

घमासान के बावजूद बागेश्वर में सुरक्षित रहे भाजपा के दोनों किले

Sat, 11 Mar 2017 10:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर Updated Sat, 11 Mar 2017 10:42 PM IST
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बागेश्वर की दोनों सीटों पर कमल खिल गया। सुरक्षित बागेश्वर विधानसभा सीट  में भाजपा के चंदन राम दास ने लगातार तीसरी बार रिकार्ड 14567 मतों से जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाई। जबकि कपकोट सीट में पूर्व मंत्री बलवंत भौर्याल 5882 मतों के साथ विजयी रहे। 
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बागेश्वर जिले की दोनों सीटों पर तमाम कयास बाजियों को दरकिनार करते हुए भाजपा ने जीत हासिल की है। टिकट बंटवारे के बाद पार्टी में मचे घमासान के बावजूद भाजपा के दोनों किले पूरी तरह से सुरक्षित रहे। टिकट बंटवारे से नाराज होकर पूरी जिला कार्यकारिणी के इस्तीफा देने से चुनावों में भाजपा असहज हो गई थी। लेकिन चुनावों में इसका कोई नुकसान पार्टी को नहीं हुआ। बागेश्वर सीट में टिकट को लेकर कांग्रेस में शुरू हुई गुटबाजी का फायदा भाजपा को मिला। बसपा की बढ़त के कारण कांग्रेस का वोट बैंक टूटा। इसका फायदा भाजपा को मिला। कांग्रेस से नाराज होकर समर्थकों के साथ आए पूर्व मंत्री राम प्रसाद टम्टा से भी भाजपा को मजबूती मिली। बागेश्वर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित साह की सभा भी बड़े वोट बैंक को पलटने में कामयाब रही। मोदी लहर के बीच चंदन दास की व्यक्तिगत सरल छवि भी मतदाताओं ने देखी।
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पिछले तीन चुनावों के परिणामों पर यदि नजर डाली जाय तो 2017 के चुनावों में भाजपा को सबसे अधिक मत मिले हैं। पिछले तीन चुनावों में यह पहला मौका है जब भाजपा के चंदन दास ने अपने प्रतिद्वंद्वी को 14567 मतों के अंतर से पटखनी दी है। कांग्रेस प्रत्याशी बालकृष्ण 19225 मतों पर सिमट गए। जबकि 2012 के चुनावों में हार-जीत का अंतर महज 1911 मतों का था। तीसरे नंबर पर रही बसपा के प्रत्याशी बसंत कुमार को 11038 मत मिले। पिछले चुनावों में बसपा के बीआर धौनी को 9877 मत मिले थे। इन चुुनावों में बसपा की बढ़त से जहां कांग्रेस पिछड़ी वहीं भाजपा का मत प्रतिशत बढ़ा। 
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कपकोट सीट पर  पूर्व मंत्री बलवंत भौर्याल 27213 मत लेकर विजयी रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के सिटिंग विधायक ललित फर्स्वाण को 5882 मतों के अंतर से पराजित किया। फर्स्वाण को 21231 मत मिले। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर नाराज होकर बसपा से चुनाव लड़ने वाले भूपेश उपाध्याय 6964 मत ही हासिल कर सके।  कपकोट सीट में यदि देखा जाए तो भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीधा मुकाबला रहा है। शुुरुआत में यहां पर भाजपा की राह आसान नजर नहीं आ रही थी। इस दुर्गम विधानसभा क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों में यातायात, शिक्षा, चिकित्सा सहित विभिन्न क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों के चलते कांग्रेस स्वयं को मजबूत मानकर चल रही थी।


भाजपा से उम्मीदवार रहे भूपेश उपाध्याय के बसपा में शामिल होने से भी भाजपा को नुकसान होने का डर था। लेकिन भाजपा सभी बाधाओं को मैनेज करने में कामयाब रही। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की सभा और सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के दौरों ने बागियों की टूटन से पैदा हुए डैमेज को कंट्रोल किया। जिला कार्यकारिणी के इस्तीफे के बाद पूर्व विधायक शेर सिंह गढ़िया को जिलाध्यक्ष की कमान सौंपने से भी इस सीट में भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हुआ। जनता ने कांग्रेस के विकास को अस्वीकार करते हुए सीधे भाजपा के पक्ष में जनादेश देकर कमल खिलाया। 
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