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अपनों के बीच दीपावली मनाकर देहरादून को रवाना हुए राज्यपाल कोश्यारी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 12:18 AM IST
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Bhagat singh Koshyari in Bageshwar
बागेश्वर में 90 वर्षीय जनसंघ कार्यकर्ता से घर जाकर मुलाकात करते राज्यपाल कोश्यारी। विज्ञप्ति - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। राज्यपाल बनने के बाद पहली बार अपनों के बीच दीपावली मनाने पैतृक गांव नामतीचेटाबगड़ पहुंचे महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी देहरादून रवाना हो गए हैं। रविवार को डिग्री कॉलेज से उन्होंने दून के लिए उड़ान भरी। तीन दिन के प्रवास के दौरान उन्होंने अपने गांव के लोगों के अलावा सत्ता पक्ष और विपक्ष के लोगों से मुलाकात की। पुराने साथियों से मिलकर उनका हालचाल भी जाना।
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रविवार को देहरादून रवानगी से पहले राज्यपाल कोश्यारी ने आनंदी एकेडमी घिरौली (मंडलसेरा) में सीनियर सेकेंडरी स्कूल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होती है। बच्चों को उन्नति और सफलता दिलाने के लिए अच्छी शिक्षा दिलाना बेहद जरूरी है।
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कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष बसंती देव, विधायक चंदन राम दास, विधायक बलवंत सिंह भौर्याल, भाजपा जिलाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट, भाजयुमो प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश गढ़िया, पूर्व विधायक शेर सिंह गढ़िया, पूर्व जिपं अध्यक्ष दीपा आर्या, डीएम विनीत कुमार, एसपी अमित श्रीवास्तव, आनंदी एकेडमी के प्रबंधक मनमोहन सिंह भाकुनी, प्रधानाचार्य गौरव पंत आदि थे।
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ईशा धामी, सक्षम और सद्भव सम्मानित
बागेश्वर। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल कोश्यारी ने राष्ट्रीय कला उत्सव की विजेता गायिका ईशा धामी और अंतरराष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी सक्षम रौतेला और सद्भव रौतेला को प्रशस्तिपत्र प्रदान किए। वृक्ष प्रेमी किशन सिंह मलड़ा को भी अब तक आठ लाख पौधे रोपने और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया।
जनसंघ के साथी से मिलने उनके आवास पर पहुंचे कोश्यारी
बागेश्वर। राज्यपाल कोश्यारी ने जिला मुख्यालय में जनसंघ के साथियों से मुलाकात की। कोश्यारी जनसंघ के कार्यकर्ता और अल्मोड़ा भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष भूपाल सिंह धपोला (देवमुनि महाराज) से मिलने उनके दुग बाजार स्थित आवास पर गए। 90 वर्षीय देवमुनि महाराज कोश्यारी को अपने आवास पर देखकर काफी खुश दिखे। करीब 20 मिनट तक दोनों में पुराने दिनों की बातें होती रही।
कोश्यारी ने कहा कि जनसंघ के समय जब वे राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर रहे थे, तब देवमुनि महाराज का काफी सहयोग मिला था। देवमुनि महाराज ने बताया कि 1952 से उन्होंने जनसंघ में सेवा की और बाद में भाजपा में निस्वार्थ भाव से कार्य किया। इस मौके पर जनसंघ से जुड़े कार्यकर्ता एडवोकेट गोविंद सिंह भंडारी और लीलाधर पंडा भी मौजूद थे।
इमरजेंसी के दौरान जेल के साथी से भी मिले भगत दा
बागेश्वर। जिला भ्रमण कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल कोश्यारी ने आपातकाल में जेल में रहने के दौरान के साथी आचार्य बसंत बल्लभ पांडेय से भी मुलाकात की। दोनों एक दूसरे के गले लगकर मिले। लोनिवि विश्राम गृह में हुई इस मुलाकात के दौरान कई लोग कोश्यारी से मिलने आते रहे। इस दौरान आचार्य पांडेय को उन्होंने अपने पास ही बैठाए रखा।
आचार्य पांडेय ने बताया कि वह और भगत दा आपातकाल के दौरान 1975 में अल्मोड़ा जेल में साथ रहे थे। जहां से कोश्यारी पर मीसा कानून के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। दोनों मित्र कार सेवा में भी एक साथ रहे थे। पांडेय ने कहा कि भगत दा जैसे इमरजेंसी के दौरान थे आज भी बिल्कुल वैसे ही हैं बेहद सरल और व्यवहारिक।
पक्ष-विपक्ष के नेताओं ने की मुलाकात
बागेश्वर। शनिवार को कोश्यारी शामा से कपकोट होते हुए शाम को बागेश्वर पहुंचे थे। लोनिवि विश्राम गृह में उनके पहुंचते ही मिलने-जुलने वालों का सिलसिला शुरू हो गया था। उनके मुलाकात करने वालों में भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के अलावा पूर्व जिपं अध्यक्ष हरीश ऐठानी, कपकोट के नगर पंचायत अध्यक्ष गोविंद सिंह बिष्ट प्रमुख रहे। इस दौरान उन्होंने कई लोगों को मुंबई आने का निमंत्रण भी दिया।

गांव के रास्तों पर चले युवाओं की तरह
बागेश्वर। राज्यपाल कोश्यारी बढ़ती उम्र के बावजूद फिटनेस के मामलों में युवाओं से कम नहीं हैं। गांव भ्रमण के दौरान वह पैदल रास्तों पर किसी युवा की माफिक चले। घर से शामा को आते समय भी वह सबसे आगे चल रहे थे। उन्होंने अपनी फिटनेस से साथ चल रहे कई लोगों को पीछे छोड़ दिया। लंबे कार्यक्रमों के बावजूद थकान उनके चेहरे पर नहीं थी। उनके कार्यक्रम में गए भगवत सिंह कोरंगा, दयाल कुमल्टा आदि ने बताया कि जितनी बार भी वह भगत दा से मिले हैं, हर समय उन्हें जोशीला पाया है। महानगरों में रहने के बावजूद गांव के जीवन से वे विमुख नहीं हुए हैं। उनके मन में पहाड़ के प्रति जोश और पहाड़ी जीवन की ललक आज भी कायम है।

पैतृक गांव नामतीचेटाबगड़ से शनिवार को पैदल शामा की ओर आते राज्यपाल कोश्यारी। विज्ञप्ति

पैतृक गांव नामतीचेटाबगड़ से शनिवार को पैदल शामा की ओर आते राज्यपाल कोश्यारी। विज्ञप्ति- फोटो : BAGESHWAR

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