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Bageshwar News: हिमालय में 3,010 मीटर ऊंचाई पर पहली बार दिखा बंगाल टाइगर

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2025 11:53 PM IST
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Bengal tiger spotted for the first time at 3,010 metres in the Himalayas
बागेश्वर। हिमालय में हिम तेंदुए और अल्पाइन पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण पर चल रहे शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। सुंदरढूंगा घाटी में करीब 3,010 मीटर की ऊंचाई पर एक बंगाल टाइगर की दुर्लभ मौजूदगी ट्रैप कैमरा में दर्ज हुई है। यह इस क्षेत्र में अब तक सबसे ऊंचाई पर बाघ पाए जाने का पुष्ट रिकॉर्ड है।
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बागेश्वर जिले के पिंडारी सुंदरढूंगा और कफनी क्षेत्र में हिम तेंदुए का पता लगाने के लिए 55 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। वन विभाग के शोधकर्ता वैज्ञानिक रजत जोशी और उनके सहायक इसकी निगरानी कर रहे हैं। परियोजना में कैमरा ट्रैपिंग, निशान सर्वेक्षण और आवास-उपयोग मॉडलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रजातियों की उपस्थिति, पारिस्थितिक कनेक्टिविटी और खाद्य श्रृंखला संरचना में हो रहे परिवर्तनों का विश्लेषण किया जा रहा है।
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डीएफओ आदित्य रत्न ने बताया कि शोध के दौरान दुर्लभ बंगाल टाइगर की गतिविधियां ट्रैप कमरे में कैद हुई हैं। उन्होंने कहा कि ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में बाघ की मौजूदगी बड़े मांसाहारी जीवों के बीच पारिस्थितिक ओवरलैप का संकेत है। यह वन्यजीवों की आवाजाही, आवास उपयोग और परिदृश्य कनेक्टिविटी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों को रेखांकित करती है।
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हिम तेंदुआ अनुसंधान परियोजना की इस उपलिब्ध को वैज्ञानिक प्रकाशन के लिए स्वीकार कर लिया गया है। यह परियोजना केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और उत्तराखंड वन विभाग की ओर वित्त पोषित है। शोध का उद्देश्य उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में मांसाहारी जीवों की आबादी, गतिशीलता जलवायु, मानवजनित गतिविधियों के प्रभावों को वैज्ञानिक आधार पर समझना है। विशेषज्ञों के अनुसार, खोज से पता चलता है कि पर्वतीय वन्य जीव बेहद अनुकूलनीय और गतिशील हैं। ऐसे शोध नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को समझने और सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक हैं।


पहली बार इतनी ऊंचाई पर दर्ज हुई बाघ की मौजूदगी

• ऊंचाई: 3,010 मीटर

• स्थान: सुंदरढूंगा घाटी, कुमाऊं के हिमालयी क्षेत्र

• कैसे दर्ज हुआ: कैमरा ट्रैप में कैद

• महत्व: वैज्ञानिक रूप से अब तक का सबसे ऊंचा रिकॉर्ड

• प्रभाव: हिम तेंदुआ और बाघ सहित बड़े मांसाहारियों के बीच पारिस्थितिक ओवरलैप की पुष्टि



शोध के मुख्य उद्देशय

• हिम तेंदुए और अन्य मांसाहारियों की आबादी का अध्ययन

• शिकारी-शिकार संबंध और आवास उपयोग का विश्लेषण

• जलवायु परिवर्तन और मानव गतिविधियों के प्रभाव की जांच

• अल्पाइन पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार करना
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