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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   BDC restricted to major choosing members

प्रमुख चुनने तक सीमित रह गए बीडीसी सदस्य

Sun, 10 Jan 2016 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Updated Sun, 10 Jan 2016 11:56 PM IST
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त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव व्यवस्था के तहत क्षेत्र पंचायत सदस्यों के पास संसाधनों का अभाव हैं। उनके पास आर्थिक अधिकार भी नहीं हैं। बजट के अभाव में जहां बीडीसी सदस्य प्रमुखों को चुनने तक सीमित रह गए हैं। वहीं क्षेत्र पंचायतों को मिलने वाला बजट भी नाकाफी साबित हो रहा है। प्रमुख भी समुचित निधि न मिलने, मानदेय न बढ़ने से खफा हैं। राज्य का पंचायती एक्ट लागू न होने से बीडीसी सदस्यों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

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दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की कल्पना को साकार करने के लिए अपने कार्यकाल में 73वां, 74वां संविधान संशोधन कराया था। इस संशोधन के जरिए जहां मतदान का अधिकार 21 साल से घटकर 18 वर्ष हुआ, वहीं ग्राम पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव सीधे जनता के जरिए कराया जा रहा है। शासन चुनाव करा रहा है, लेकिन बीडीसी सदस्यों केे पास प्रमुख, ज्येष्ठ, कनिष्ठ उपप्रमुख को चुनने के अलावा कोई अन्य अधिकार नहीं हैं।
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कई ग्राम प्रधान तो उन्हें पंचायत की बैठकों में बुलाना तक जरूरी नहीं समझते। यही व्यवहार सरकारी महकमे भी करते हैं जबकि ग्राम पंचायत की खुली बैठकों में पारित प्रस्ताव बीडीसी सदस्य के माध्यम से ही ब्लॉक तक पहुंचाने की बात कही गई थी। क्षेत्र पंचायतों को पहले 13वें वित्त आयोग से बजट मिलता था। केंद्र सरकार ने इस बार 14वें वित्त के तहत बजट देना भी बंद कर दिया है।
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 बजट न मिलने के कारण गांवों के विकास पर बुरा असर पड़ने लगा है। जिले के तीनों ब्लॉकों में क्रमश: बागेश्वर, कपकोट, गरुड़ में 40-40 बीडीसी सदस्य हैं। राज्य, क्षेत्र पंचायत निधि में मिलने वाला बजट भी नाकाफी साबित हो रहा है। ब्लॉक प्रमुखों ने वर्ष अपनी निधि में बजट देने के लिए पूर्व में लंबा संघर्ष किया लेकिन इस निधि में भी वर्ष 2013 से बजट नहीं मिला है।

निधि में बजट न आने से ब्लॉक प्रमुख भी गांवों के भ्रमण के दौरान छोटी-छोटी समस्याएं नहीं सुलझा पा रहे हैं। प्रमुखों को गांवों का वृहद भ्रमण करने के अलावा कई कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए कई बार जिला मुख्यालय के अलावा देहरादून तक की दौड़ लगानी पड़ती है लेकिन मानदेय के नाम पर उन्हें सिर्फ चार हजार रुपये प्रतिमाह मिलता है।

ब्लॉक प्रमुख बागेश्वर रेखा खेतवाल, कपकोट मनोहर राम ने बताया कि बजट के बगैर के गांवों का भी अपेक्षित भ्रमण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि 14 वां वित्त की बहाली, प्रमुख निधि में बजट, मानदेय के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। बागेश्वर के विधायक चंदन राम दास, कपकोट के विधायक ललित फर्स्वाण ने कहा कि बीडीसी सदस्यों, प्रमुखों की समस्याओं के समाधान के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।


पंचायतों के सशक्तिकरण में यह विडंबना भी बाधक बनी है कि कुछ क्षेत्र में ब्लॉक प्रमुख का कार्यक्षेत्र विधायक से भी बड़ा है। एक्ट पारित कराने वाले मंत्री भी मूलत: विधायक ही होते हैं। जिन विधायकों के क्षेत्र में अपने राजनीतिक दल से जुड़े ब्लॉक प्रमुख हैं, वहां तो तालमेल है, अन्यथा विपक्ष के हावी होने का खतरा रहता है। वहीं समान राजनीतिक दल से जुड़ा होने के कारण चुनाव के दौरान कई सीटों पर तो अपने टिकट के लिए विधायकों को ब्लॉक प्रमुख से ही चुनौती मिल रही है।

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