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बागेश्ववर जिला पंचायत का विवाद : आंदोलनरत सदस्यों की एएमए संग हुई वार्ता भी विफल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 03 Jul 2021 11:12 PM IST
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Bageshwar District Panchayat dispute: members Talks with AMA also failed
बागेश्वर। जिला पंचायत की अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर जिपं उपाध्यक्ष और सदस्यों का आंदोलन शनिवार को भी जारी रहा। आंदोलित उपाध्यक्ष और सदस्यों से जिपं के प्रभारी एएमए की वार्ता एक बार फिर विफल रही।
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जिला पंचायत उपाध्यक्ष नवीन परिहार के नेतृत्व में धरने पर बैठे जिपं सदस्यों ने मांगों को लेकर नारेबाजी की। इस दौरान जिपं. के प्रभारी एएमए सुनील कुमार आंदोलनरत सदस्यों से वार्ता करने आए। सदस्यों ने एएमए से कहा कि जिला पंचायत में 55 प्रतिशत बजट विवेकाधीन कोष के नाम पर रखा जा रहा है। स्वीकृत से अधिक पदों पर नियुक्ति की गई है। जिपं के वाहन चालकों से काम न लेकर संविदा पर तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मी वाहन चला रहे हैं। अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस पर प्रभारी एएमए ने मुद्दों के समाधान के लिए कुछ समय मांगा। उपाध्यक्ष और सदस्यों ने 24 घंटे के भीतर पंचायतीराज एक्ट की प्रमाणिक प्रति देने के साथ ही 55 प्रतिशत बजट विवेकाधीन कोष के नाम पर रखने का जवाब देने के लिए कहा। कहा कि मांगों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन स्थगित नहीं किया जाएगा। धरने में जिपं सदस्य हरीश ऐठानी, सुरेंद्र खेतवाल, गोपा धपोला, वंदना ऐठानी, इंदिरा जोशी, रूपा कोरंगा, रेखा देवी, पूजा आर्या बैठे।
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जिपं. हमारे अधीन नहीं : डीपीआरओ
बागेश्वर। पंचायतीराज एक्ट के संबंध में जिला पंचायतराज अधिकारी बसंत सिंह मेहता ने अजीब बयान दिया है। उनका कहना है कि जिला पंचायत जिला पंचायतराज कार्यालय के अधीन नहीं है। उसकी अलग बॉडी होती है। उसके सर्वेसर्वा एएमए होते हैं। उनका ये भी कहना है कि जिला पंचायत पर जिला पंचायतराज कार्यालय की अधिक दखलंदाजी नहीं होती है। पंचायतीराज अधिनियम में समितियों के कार्यकाल के संबंध में पूछने पर डीपीआरओ ने कहा कि पंचायतीराज में कार्यकाल का कोई उल्लेख नहीं है। उनके पास जिला पंचायत का एक्ट नहीं है। उनके पास ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत का एक्ट है, जिला पंचायत का एक्ट जिपं के पास होगा। पंचायतीराज एक्ट तो एक ही होगा के सवाल पर डीपीआरओ कहते हैं कि एक्ट तो एक ही है लेकिन उसमें केवल नियोजन, शिक्षा और पेयजल स्वच्छता समिति के बारे में लिखा है। समितियों के कार्यकाल के बारे में कुछ नहीं लिखा है।
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