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औषधीय और सगंध पौधों में खोजें आजीविका
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बागेश्वर के कौसानी में आयोजित कार्यशाला में किसानों और विदेशी महिला को पौधे बांटते सीमैप के अधि?
- फोटो : BAGESHWAR
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कौसानी (बागेश्वर)। सीमैप पुरड़ा और हिमालयन स्टडी सेंटर की ओर से कौसानी में कृषक गोष्ठी और प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बंदर और जंगली सुअर के आतंक से परेशान किसानों को औषधीय और सगंध खेती के माध्यम से आजीविका अर्जित करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में बागेश्वर, अल्मोड़ा और पौड़ी गढ़वाल के किसानों ने शिरकत की।
बुरांश रिट्रीट में आयोजित कार्यशाला में सीमैप के तकनीकी अधिकारी प्रबल प्रताप सिंह वर्मा ने किसानों को खेेती के वैज्ञानिकीकरण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती को बेहतर करने के लिए तकनीक का सहारा लेना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से किसान स्वयं के उपभोग के अलावा विक्रय के लिए भी उत्पादन कर सकते हैं। गोष्ठी में आए किसानों ने पहाड़ों में जंगली जानवर विशेष तौर पर बंदर और सुअरों के आतंक से खेती को हो रहे नुकसान की परेशानी बताई।
वर्मा ने कहा कि जानवरों से बचाव के लिए औषधीय और सगंध खेती बेहतर विकल्प है। इन पौधों को जानवर नुकसान नहीं करेंगे और आय में भी इजाफा होगा। अनामय आश्रम की आयुर्वेदाचार्य डॉ. गुंजन ने आयुर्वेद पद्धति में उपयोगी पौधों की जानकारी दी। कहा कि वर्तमान में आयुर्वेद के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ रहा है। कोरोना काल के बाद लोगों का रुझान आयुर्वेद की तरफ हुआ है, जिसके चलते औषधीय पौधों का उत्पादन आय अर्जित करने का बेहतर विकल्प बन गया है। आयोजक थ्रीश कपूर ने औषधीय पौधों का उत्पादन और इससे आय अर्जित करने के जानकारी दी। कार्यशाला में सीमैप के रिसर्च एसोसिएट बृजेश कुमार ने भी उपयोगी जानकारी दी। समापन पर किसानों को रोजमेरी और जिरेनियम के पौधे वितरित किए गए।
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बुरांश रिट्रीट में आयोजित कार्यशाला में सीमैप के तकनीकी अधिकारी प्रबल प्रताप सिंह वर्मा ने किसानों को खेेती के वैज्ञानिकीकरण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती को बेहतर करने के लिए तकनीक का सहारा लेना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से किसान स्वयं के उपभोग के अलावा विक्रय के लिए भी उत्पादन कर सकते हैं। गोष्ठी में आए किसानों ने पहाड़ों में जंगली जानवर विशेष तौर पर बंदर और सुअरों के आतंक से खेती को हो रहे नुकसान की परेशानी बताई।
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वर्मा ने कहा कि जानवरों से बचाव के लिए औषधीय और सगंध खेती बेहतर विकल्प है। इन पौधों को जानवर नुकसान नहीं करेंगे और आय में भी इजाफा होगा। अनामय आश्रम की आयुर्वेदाचार्य डॉ. गुंजन ने आयुर्वेद पद्धति में उपयोगी पौधों की जानकारी दी। कहा कि वर्तमान में आयुर्वेद के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ रहा है। कोरोना काल के बाद लोगों का रुझान आयुर्वेद की तरफ हुआ है, जिसके चलते औषधीय पौधों का उत्पादन आय अर्जित करने का बेहतर विकल्प बन गया है। आयोजक थ्रीश कपूर ने औषधीय पौधों का उत्पादन और इससे आय अर्जित करने के जानकारी दी। कार्यशाला में सीमैप के रिसर्च एसोसिएट बृजेश कुमार ने भी उपयोगी जानकारी दी। समापन पर किसानों को रोजमेरी और जिरेनियम के पौधे वितरित किए गए।
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