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प्रमाण पत्र नहीं मिलने से राज्य आंदोलनकारी खफा
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Wed, 21 Sep 2016 10:58 PM IST
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राज्य निर्माण के 15 बरस बाद भी राज्य आंदोलनकारियों को पहचान और प्रमाण पत्र नहीं मिल सके हैं। गुस्साएं आंदोलनकारियों ने अब इस लंबित मांग को मनवाने के लिए आंदोलन शुरू करने का मन बना लिया है। सर्वदलीय उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संगठन की जिला इकाई ने दो अक्तूबर को जिला मुख्यालय पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर श्रद्धांजलि सभा के बाद आंदोलन की रणनीति तैयार करने का एलान कर दिया है।
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सर्वदलीय उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संगठन की जिला इकाई के अध्यक्ष पूरन चंद्र पाठक ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के साथ अब तक की सरकारों ने उपेक्षा की है। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने तहसील प्रशासन और एलआईयू से दो दो बार जांच पड़ताल करके 352 आंदोलनकारियों को चिंहित किया था लेकिन तब से आंदोलनकारियों को पहचान और प्रमाण पत्र जारी नहीं किए हैं जिन गिने चुने लोगों को आंदोलनकारी होने के प्रमाण पत्र दिए भी हैं। उन्हें देय सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।
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जिला प्रशासन को विभिन्न जिले के आंदोलनकारियों को मिले प्रमाण पत्रों की सूचना भी उपलब्ध कराई गई। लेकिन प्रशासन उसे ठीक से समझ नहीं सका। प्रमाण पत्र जारी करने की मांग को लेकर कई बार आंदोलन किए गए। कुछ लोग इस मांग को लेकर न्यायालय की शरण में भी गए हैं। आंदोलनकारियों के मामलों को जनप्रतिनिधियों ने भी तवज्जो नहीं दी है।
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पाठक ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर अलग राज्य का निर्माण हुआ। सरकार ने अब उस मूल अवधारणा को ही भुला दिया है। गांवों का विकास होता तो पलायन नहीं होता। स्कूलों में शिक्षक, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं। रोजगार के संसाधन कुछ भी नहीं हैं। जंगली जानवरों का इंतजाम नहीं होने के कारण कई लोगों ने कृषि, बागवानी और फलोत्पादन का काम छोड़ दिया है। बावजूद सरकार विकास के बड़े बड़े दावे करते थक नहीं रही है।