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एक दर्जन नदियां फिर भी नहीं मिलता जरूरत का पानी
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Fri, 17 Mar 2017 11:01 PM IST
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बागेश्वर नगर में धारे से पानी भरते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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सरयू, गोमती और पिंडर सहित लगभग दर्जन भर नदियों के किनारे बसे बागेश्वर जिले की ढाई लाख की आबादी की प्यास बुझाने के लिए आज तक पर्याप्त योजनाएं नहीं बन पाई हैं। हालात यह है कि जिले में 178 पेयजल योजनाएं और 524 हैंडपंप होने के बावजूद आधी से अधिक आबादी को जरूरत का पानी भी नहीं मिल पाता है।
जिले में निवास करने वाली 2.50 लाख की आबादी की प्यास बुझाने के लिए कुल 178 पेयजल योजनाएं बनाई गई हैं। इनमें से दो पेयजल योजनाएं नगरीय जबकि 176 योजनाएं ग्रामीण हैं। बागेश्वर नगर की लगभग 20 हजार की आबादी के लिए अभी तक दशकों पुराने पंपिंग सिस्टम से पानी दिया जाता था। अब नया फिल्टरेशन वेल सिस्टम लगा दिया गया है। इससे साफ पानी की आपूर्ति तो सुचारु हो गई है, लेकिन मुख्य टैंक से घरों के लिए पानी सप्लाई की लाइनें पुरानी ही हैं।
इससे नगर के जल संकट वाले क्षेत्रों में कोई फायदा फिलहाल जनता को नहीं मिला है। लोग सड़कों के किनारे लगाए गए हैंडपंपों से भी जलापूर्ति करते हैं। गरुड़ क्षेत्र में छह से सात एमएलडी पानी की जरूरत है, लेकिन लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता है, कहीं पर लोग प्राकृतिक जल स्रोतों के ही भरोसे रहते हैं। कपकोट में पेयजल की स्थिति कुछ हद तक ठीक है, लेकिन कांडा में हालात बेहद खराब हैं। कांडा पड़ाव से लेकर कई गांव ऐसे हैं जहां पर साल भर जल संकट बना रहता है।
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कांडा का पड़ाव क्षेत्र तक एकमात्र पेयजल योजना के भरोसे हैं। जल संस्थान ने जलापूर्ति के लिए जिले में 524 हैंडपंप लगाए गए हैं। इस समय एक दर्जन पंप खराब चल रहे हैं। सड़कों के किनारे रहने वाले लोग इन पंपों से भी अपनी प्यास बुझाते हैं। दूर-दराज गांवों के लोग परंपरागत नौले-धारों से पीने का पानी जुटाते हैं। पिछले एक दशक में प्राकृतिक स्रोतों के आसपास भवनों का निर्माण होने से स्रोतों का पानी दूषित हो गया है और कई स्रोत सूख गए हैं। बागेश्वर जिले में खनन के कारण पेयजल स्रोतों को भारी नुकसान पहुंचा है। पर्यावरणविद किशन मलड़ा का कहना है कि अनियंत्रित विकास, खनन, विस्फोटकों के प्रयोग से जल स्रोतों पर संकट गहराया है। इन स्रोतों को रीचार्ज करने के लिए इनके आसपास चौड़ी पत्ती वाले वन विकसित करने की जरूरत है। यदि स्रोतों की उपेक्षा की गई तो भविष्य में जल संकट और अधिक गहराएगा।
.................इनसेट................
बागेश्वर जिले में कुल पेयजल योजनाएं- 178
ग्रामीण - 176
नगरीय - 02
हैंडपंप - 524
खराब - 12
जिले में निवास करने वाली 2.50 लाख की आबादी की प्यास बुझाने के लिए कुल 178 पेयजल योजनाएं बनाई गई हैं। इनमें से दो पेयजल योजनाएं नगरीय जबकि 176 योजनाएं ग्रामीण हैं। बागेश्वर नगर की लगभग 20 हजार की आबादी के लिए अभी तक दशकों पुराने पंपिंग सिस्टम से पानी दिया जाता था। अब नया फिल्टरेशन वेल सिस्टम लगा दिया गया है। इससे साफ पानी की आपूर्ति तो सुचारु हो गई है, लेकिन मुख्य टैंक से घरों के लिए पानी सप्लाई की लाइनें पुरानी ही हैं।
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इससे नगर के जल संकट वाले क्षेत्रों में कोई फायदा फिलहाल जनता को नहीं मिला है। लोग सड़कों के किनारे लगाए गए हैंडपंपों से भी जलापूर्ति करते हैं। गरुड़ क्षेत्र में छह से सात एमएलडी पानी की जरूरत है, लेकिन लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता है, कहीं पर लोग प्राकृतिक जल स्रोतों के ही भरोसे रहते हैं। कपकोट में पेयजल की स्थिति कुछ हद तक ठीक है, लेकिन कांडा में हालात बेहद खराब हैं। कांडा पड़ाव से लेकर कई गांव ऐसे हैं जहां पर साल भर जल संकट बना रहता है।
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कांडा का पड़ाव क्षेत्र तक एकमात्र पेयजल योजना के भरोसे हैं। जल संस्थान ने जलापूर्ति के लिए जिले में 524 हैंडपंप लगाए गए हैं। इस समय एक दर्जन पंप खराब चल रहे हैं। सड़कों के किनारे रहने वाले लोग इन पंपों से भी अपनी प्यास बुझाते हैं। दूर-दराज गांवों के लोग परंपरागत नौले-धारों से पीने का पानी जुटाते हैं। पिछले एक दशक में प्राकृतिक स्रोतों के आसपास भवनों का निर्माण होने से स्रोतों का पानी दूषित हो गया है और कई स्रोत सूख गए हैं। बागेश्वर जिले में खनन के कारण पेयजल स्रोतों को भारी नुकसान पहुंचा है। पर्यावरणविद किशन मलड़ा का कहना है कि अनियंत्रित विकास, खनन, विस्फोटकों के प्रयोग से जल स्रोतों पर संकट गहराया है। इन स्रोतों को रीचार्ज करने के लिए इनके आसपास चौड़ी पत्ती वाले वन विकसित करने की जरूरत है। यदि स्रोतों की उपेक्षा की गई तो भविष्य में जल संकट और अधिक गहराएगा।
.................इनसेट................
बागेश्वर जिले में कुल पेयजल योजनाएं- 178
ग्रामीण - 176
नगरीय - 02
हैंडपंप - 524
खराब - 12