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बागेश्वर के 350 युवा मछली पालन से चला रहे आजीविका
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बागेश्वर के लीती में बनाया गया मछली तालाब।
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। लॉकडाउन के दौरान महानगरों से घर लौटे युवाओं के लिए मत्स्य पालन मददगार बना है। मत्स्य विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर जिले के 350 से अधिक युवाओं को मछली पालन ने आत्मनिर्भर बनाया है।
वर्तमान में कपकोट के जगथाना, लीती, बड़ेत, दुधिला लीली, गरुड़ के गागरीगोल, पुरड़ा, मैगड़ीस्टेट, लौबांज, कांडा के रावतसेरा, धपोलासेरा और बागेश्वर के थुणाई, बहुली, काफलीगैर आदि क्षेत्रों के युवा मछली पालन से आजीविका कमा रहे हैं। मछली पालन के इच्छुक युवाओं को विभाग से हरसंभव मदद दी जा रही है। मछलियों के बीज, चारे, तालाब बनाने में विभाग का सहयोग मिलता है।
तालाब निर्माण से चारे तक मिलती है सब्सिडी
बागेश्वर। मछली पालन मुख्यत: पानी की उपयोगिता पर निर्भर करता है। जिन गांवों में पानी प्रचुर मात्रा में हैं, वहां के मछली पालक 50, 100 या 200 वर्ग मीटर का तालाब बनाकर मछली पालन शुरू कर सकते हैं। मछली पालन के लिए कच्चा तालाब निर्माण के लिए मत्स्य विभाग से सामान्य वर्ग के लिए 40 और एससी-एसटी वर्ग के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है। मछली के बीज विभाग और सीट विभाग से निशुल्क दिए जाते हैं। चारे में भी 50 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जाती है। मछली पालकों की मांग के अनुसार चारा उनके घर तक पहुंचाने का प्रबंध भी किया जाता है।
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तीन प्रजाति की मछलियों का हो रहा उत्पादन
बागेश्वर। शुरुआत में जिले में केवल कॉर्प प्रजाति की मछली का उत्पादन किया जाता था। यह देेशी प्रजाति की मछली है, जिसमें मछली पालकों को उम्मीद के अनुरूप लाभ नहीं हो रहा था। जिसे देखते हुए विभाग ने हाइब्रिड प्रजाति की पंगास और ट्राउट मछली का बीज किसानों को दिया। इससे अच्छी मात्रा में मछली का उत्पादन हो रहा है और मछली पालकों को भी पहले की तुलना में अधिक मुनाफा हो रहा है।
जिले में मछली पालन को लेकर युवाओं में जागरूकता आ रही है। जिसे देखते हुए विभाग भी अधिक से अधिक सुविधाएं जिला स्तर पर मुहैया कराने के प्रयास में जुट गया है। जिले में सीट, चारे और दवाइयों के वितरण के लिए एक केंद्र खोलने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जिसके बाद मछली पालकों को इन सामग्री के लिए हल्द्वानी या रुद्रपुर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
मनोज मियान, मत्स्य निरीक्षक बागेश्वर
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वर्तमान में कपकोट के जगथाना, लीती, बड़ेत, दुधिला लीली, गरुड़ के गागरीगोल, पुरड़ा, मैगड़ीस्टेट, लौबांज, कांडा के रावतसेरा, धपोलासेरा और बागेश्वर के थुणाई, बहुली, काफलीगैर आदि क्षेत्रों के युवा मछली पालन से आजीविका कमा रहे हैं। मछली पालन के इच्छुक युवाओं को विभाग से हरसंभव मदद दी जा रही है। मछलियों के बीज, चारे, तालाब बनाने में विभाग का सहयोग मिलता है।
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तालाब निर्माण से चारे तक मिलती है सब्सिडी
बागेश्वर। मछली पालन मुख्यत: पानी की उपयोगिता पर निर्भर करता है। जिन गांवों में पानी प्रचुर मात्रा में हैं, वहां के मछली पालक 50, 100 या 200 वर्ग मीटर का तालाब बनाकर मछली पालन शुरू कर सकते हैं। मछली पालन के लिए कच्चा तालाब निर्माण के लिए मत्स्य विभाग से सामान्य वर्ग के लिए 40 और एससी-एसटी वर्ग के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है। मछली के बीज विभाग और सीट विभाग से निशुल्क दिए जाते हैं। चारे में भी 50 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जाती है। मछली पालकों की मांग के अनुसार चारा उनके घर तक पहुंचाने का प्रबंध भी किया जाता है।
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तीन प्रजाति की मछलियों का हो रहा उत्पादन
बागेश्वर। शुरुआत में जिले में केवल कॉर्प प्रजाति की मछली का उत्पादन किया जाता था। यह देेशी प्रजाति की मछली है, जिसमें मछली पालकों को उम्मीद के अनुरूप लाभ नहीं हो रहा था। जिसे देखते हुए विभाग ने हाइब्रिड प्रजाति की पंगास और ट्राउट मछली का बीज किसानों को दिया। इससे अच्छी मात्रा में मछली का उत्पादन हो रहा है और मछली पालकों को भी पहले की तुलना में अधिक मुनाफा हो रहा है।
जिले में मछली पालन को लेकर युवाओं में जागरूकता आ रही है। जिसे देखते हुए विभाग भी अधिक से अधिक सुविधाएं जिला स्तर पर मुहैया कराने के प्रयास में जुट गया है। जिले में सीट, चारे और दवाइयों के वितरण के लिए एक केंद्र खोलने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। जिसके बाद मछली पालकों को इन सामग्री के लिए हल्द्वानी या रुद्रपुर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
मनोज मियान, मत्स्य निरीक्षक बागेश्वर