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कभी भी तबाही ला सकती है शंभू नदी में बनी झील
Updated Sat, 12 May 2018 10:37 PM IST
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narmada dam
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बागेश्वर। जनपद के अंतिम गांव कुंवारी की जमीन को काटने वाली शंभू नदी में दो सौ मीटर लंबी एक झील खतरा बनी हुई है। यदि बरसात में दबाव पड़ने से झील फटी तो कुमाऊं के साथ ही गढ़वाल के देवाल और थराली क्षेत्र तक भारी तबाही मच सकती है। प्रशासन की सूचना पर वाडिया इंस्टीट्यूट, डीएमएमसी और जीएसआई के भू वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की एक टीम झील का निरीक्षण करेगी।
कुमाऊं और गढ़वाल की सीमा पर स्थित कुंवारी गांव में 2013 में आपदा के कारण भारी तबाही मची थी। पहाड़ी से शंभू नदी में भारी मात्रा में मलबा और चट्टाने गिरने से सकलभ्यूड़ नामक स्थान पर लगभग दो सौ मीटर लंबी झील बन गई थी। इस झील की अब तक निकासी नहीं हो पाई है। जिस स्थान पर यह झील बनी है उससे लगभग ढाई सौ मीटर नीचे पिंडर नदी स्थित है। पिंडर नदी कुमाऊं के इस अंतिम गांव की सीमा के बाद गढ़वाल में प्रवेश करती है। तोली के जिला पंचायत सदस्य गोविंद सिंह दानू ने बताया कि कुंवारी गांव गढ़वाल के देवाल से लगा हुआ है। आपदा के बाद यहां के ग्रामीणों की आवाजाही के लिए अब शंभू नदी में विलुप नामक स्थान पर एकमात्र पुल बचा है। यदि झील फटी तो यह पुल भी बह जाएगा। इससे कुमांऊ और गढ़वाल के गांवों का संपर्क भंग होने के साथ ही भारी नुकसान होने की आशंका है।
झील खोलने के लिए नहीं है स्थान
बागेश्वर। शंभू नदी में बनी झील के मुहाने पर केवल एक व्यक्ति के खड़ा होने लायक स्थान है। बेहद दुर्गम होने से मशीनें वहां पर ले जा पाना संभव नहीं है। मलबा हटाने के लिए मजदूर लगाना ही मजबूरी होगी। ऐसे में यदि मलबा हटाने का प्रयास किया गया तो काम में लगे मजदूरों के बहने का भी खतरा है। इसको देखते हुए तहसील प्रशासन ने झील को खोलने के लिए शासन से भू वैज्ञानिक और अन्य विशेषज्ञ भेजने की मांग की है।
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शंभू नदी में मलबा गिरने से झील बनी है। बरसात में अधिक दबाव पड़ने पर झील के फटने का खतरा है। इसको देखते हुए वाडिया इंस्टीट्यूट, डीएमएमसी और जीएसआई के भू वैज्ञानिकों की एक टीम जल्दी झील का निरीक्षण करने आ रही है। विशेषज्ञों की राय के बाद ही झील के पानी की निकासी के प्रयास किए जाएंगे। फिलहाल झील से कोई खतरा नहीं है। बरसात से पहले ही झील के पानी की निकासी कर दी जाएगी।
- रवींद्र सिंह बिष्ट
एसडीएम, कपकोट
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कुमाऊं और गढ़वाल की सीमा पर स्थित कुंवारी गांव में 2013 में आपदा के कारण भारी तबाही मची थी। पहाड़ी से शंभू नदी में भारी मात्रा में मलबा और चट्टाने गिरने से सकलभ्यूड़ नामक स्थान पर लगभग दो सौ मीटर लंबी झील बन गई थी। इस झील की अब तक निकासी नहीं हो पाई है। जिस स्थान पर यह झील बनी है उससे लगभग ढाई सौ मीटर नीचे पिंडर नदी स्थित है। पिंडर नदी कुमाऊं के इस अंतिम गांव की सीमा के बाद गढ़वाल में प्रवेश करती है। तोली के जिला पंचायत सदस्य गोविंद सिंह दानू ने बताया कि कुंवारी गांव गढ़वाल के देवाल से लगा हुआ है। आपदा के बाद यहां के ग्रामीणों की आवाजाही के लिए अब शंभू नदी में विलुप नामक स्थान पर एकमात्र पुल बचा है। यदि झील फटी तो यह पुल भी बह जाएगा। इससे कुमांऊ और गढ़वाल के गांवों का संपर्क भंग होने के साथ ही भारी नुकसान होने की आशंका है।
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झील खोलने के लिए नहीं है स्थान
बागेश्वर। शंभू नदी में बनी झील के मुहाने पर केवल एक व्यक्ति के खड़ा होने लायक स्थान है। बेहद दुर्गम होने से मशीनें वहां पर ले जा पाना संभव नहीं है। मलबा हटाने के लिए मजदूर लगाना ही मजबूरी होगी। ऐसे में यदि मलबा हटाने का प्रयास किया गया तो काम में लगे मजदूरों के बहने का भी खतरा है। इसको देखते हुए तहसील प्रशासन ने झील को खोलने के लिए शासन से भू वैज्ञानिक और अन्य विशेषज्ञ भेजने की मांग की है।
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शंभू नदी में मलबा गिरने से झील बनी है। बरसात में अधिक दबाव पड़ने पर झील के फटने का खतरा है। इसको देखते हुए वाडिया इंस्टीट्यूट, डीएमएमसी और जीएसआई के भू वैज्ञानिकों की एक टीम जल्दी झील का निरीक्षण करने आ रही है। विशेषज्ञों की राय के बाद ही झील के पानी की निकासी के प्रयास किए जाएंगे। फिलहाल झील से कोई खतरा नहीं है। बरसात से पहले ही झील के पानी की निकासी कर दी जाएगी।
- रवींद्र सिंह बिष्ट
एसडीएम, कपकोट