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सांस्कृतिक नीति नहीं बनने से रंगकर्मी आहत

Tue, 30 Jan 2018 12:10 AM IST
Updated Tue, 30 Jan 2018 12:10 AM IST
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सांस्कृतिक नीति नहीं बनने से रंगकर्मी आहत
बागेश्वर। राज्य निर्माण के 17 साल बाद भी राज्य में सांस्कृतिक नीति नहीं बनने से रंगकर्मी आहत हैं। युग मंच नैनीताल के अध्यक्ष और संस्कृति नाट्य अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष जहूर आलम ने कहा कि संस्कृति अधिनियम न बन पाने से भावी पीढ़ी राज्य संस्कृति, बोली, भाषा और दुर्लभ पांडुलिपियों को ही भूल जाएगी।
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अमर उजाला से एक भेंट में युग मंच नैनीताल के अध्यक्ष आलम ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन को धार देने में रंगकर्मियों का बड़ा योगदान रहा है। रंगकर्मियों को आशा थी कि अलग राज्य बनेगा तो संस्कृति को संरक्षण मिलेगा। सांस्कृतिक नीति बनने पर युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस दिशा में 2005-06 में आई एनडी तिवारी की सरकार ने सांस्कृतिक अकादमी का गठन किया। इसके उपाध्यक्ष पद्मश्री यशोधर मठपाल, पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी रह चुके हैं। इसके तहत तब तीन साल तक कई जगह नाट्य महोत्सवों के आयोजन के साथ संस्कृति और धरोहर को सहेजने का काम शुरू हुआ था। आज हालात यह हैं कि नैनीताल के शैले हॉल से सुविधाएं गायब हैं और उसका एक दिन का किराया बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दिया गया है। शासकीय उपेक्षा के कारण अल्मोड़ा का उदय शंकर नाट्य एकेडमी का भवन शोपीस बना हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य में संस्कृति एक्ट बनने से संस्कृति को तो संरक्षण मिलेगा ही साथ ही भावी पीढ़ी इस क्षेत्र मेें भी अपना करियर तलाशेगी।
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