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आपातकाल की दास्तां सुनाकर भावुक हो जाते हैं बसंत
Updated Wed, 10 Oct 2018 11:49 PM IST
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बागेश्वर। 1974 में लगे आपातकाल के दौरान जेल में बिताए दिनों को याद कर आचार्य बसंत बल्लभ पांडेय भावुक हो जाते हैं। आपातकाल के दौरान 27 माह जेल में काट चुके बसंत कहते हैं कि पुलिस के जुल्म ने अंग्रेजी शासन काल की याद दिला दी थी।
1974 में आपातकाल के दौरान आचार्य बसंत बल्लभ पांडेय बागेश्वर में आरएसएस के कार्यालय में नियुक्त थे। सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षक पद पर कार्यरत थे। संघ की गतिविधियों को संचालित करने के लिए उन्हें विस्तारक का दायित्व भी सौंपा था। 25 जून 1974 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आपातकाल की घोषणा के कुछ घंटे के बाद ही देशभर में आरएसएस सहित विपक्ष के नेताओं की गिरफ्तारी शुरू हो गई। इसी दौरान उन्हें भी बागेश्वर के आरएसएस कार्यालय से गिरफ्तार कर अल्मोड़ा जेल भेज दिया गया।
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27 माह तक जेल में पुलिस यातनाएं सही। परिवार ने भी कई तरह की परेशानियां झेल बताते हैं कि सबसे दुखद यह रहा कि जेल जाने से पूर्व पुलिस ने सुरक्षा के नाम पर जनेऊ, अंगूठी तक उतरवा ली थी। पूरे देश में आपातकाल का विरोध कर रहे नानाजी देशमुख और लोक नायक जय प्रकाश नारायण की अपील को जन-जन तक पहुंचाने के लिए संकल्पबद्ध आचार्य बसंत बल्लभ पांडेय ने पुलिस प्रशासन से माफी नहीं मांगी।
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