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भेदभाव होने से अर्द्घ सैनिक बलों के कार्मिक आहत
Updated Mon, 12 Mar 2018 10:52 PM IST
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बागेश्वर। पूर्व सशस्त्र पैरामिलट्री फोर्सेज कार्मिक संगठन ने अर्द्ध सैनिक बल के जवानों को भी सेना की तरह सभी सुविधाएं देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि समान कार्य के बावजूद भेदभाव होने से अर्द्ध सैनिक बलों के कार्मिक आहत हैं।
संगठन की देहरादून में आयोजित बैठक से लौटे जिलाध्यक्ष मोहन सिंह कपकोटी ने बताया कि अर्द्ध सैनिक बलों के जवान भी सेना के जवानों की तरह देश की रक्षा के लिए सीमाओं पर तैनात रहते हैं। सीमाओं की रक्षा के लिए जान देने वाले अर्द्ध सैनिकों केे शहीद का दर्जा भी नहीं दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि अर्द्ध सैनिक बलों के पूर्व कार्मिकों को मेडिकल सुविधा, कैंटीन सहित अन्य सुविधाओं के लिए लंबे समय से मांग उठाई जा रही है, लेकिन अभी तक उनकी मांगों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि देहरादून में हुई बैठक में संगठन के प्रदेश पदाधिकारी पूर्व आइजी एसएस कोठियाल, पूर्व डीआइजी डीसी बहुगुणा, एसएस नेगी और टीसी शर्मा द्वारा पैरामिलिट्री फोर्सेज का अलग निदेशालय और पेंशन नियम सिविल सर्विस से अलग बनाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। सभी कार्मिक भेदभाव से आहत हैं।
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उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों के संबंध में उचित कार्रवाई नहीं करती है तो 2019 में होने वाले चुनावों में इस उपेक्षा का जवाब दिया जाएगा।
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संगठन की देहरादून में आयोजित बैठक से लौटे जिलाध्यक्ष मोहन सिंह कपकोटी ने बताया कि अर्द्ध सैनिक बलों के जवान भी सेना के जवानों की तरह देश की रक्षा के लिए सीमाओं पर तैनात रहते हैं। सीमाओं की रक्षा के लिए जान देने वाले अर्द्ध सैनिकों केे शहीद का दर्जा भी नहीं दिया जाता है।
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उन्होंने कहा कि अर्द्ध सैनिक बलों के पूर्व कार्मिकों को मेडिकल सुविधा, कैंटीन सहित अन्य सुविधाओं के लिए लंबे समय से मांग उठाई जा रही है, लेकिन अभी तक उनकी मांगों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि देहरादून में हुई बैठक में संगठन के प्रदेश पदाधिकारी पूर्व आइजी एसएस कोठियाल, पूर्व डीआइजी डीसी बहुगुणा, एसएस नेगी और टीसी शर्मा द्वारा पैरामिलिट्री फोर्सेज का अलग निदेशालय और पेंशन नियम सिविल सर्विस से अलग बनाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। सभी कार्मिक भेदभाव से आहत हैं।
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उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों के संबंध में उचित कार्रवाई नहीं करती है तो 2019 में होने वाले चुनावों में इस उपेक्षा का जवाब दिया जाएगा।