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बागनाथ मंदिर के पुरोहितों के लिए बनाए नियम
Updated Sun, 10 Jun 2018 11:08 PM IST
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बागेश्वर। बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति की हुई बैठक में पुरोहितों से मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का नियमानुसार पूजा कराने को कहा गया। समिति ने कहा कि श्रद्धालुओं पर पूजा कराने के लिए दबाव न बनाएं। उन्होंने कहा कि जो पुरोहित पहले आकर जिस स्थान पर अपना आसन लगाए वह शाम तक आसन दूसरे स्थान पर नहीं बदलेगा। मंदिर की छवि दूसरे स्थानों पर अच्छा जाए इसके लिए सभी का नियमों का पालन करना जरूरी होगा।
मंदिर समिति के अध्यक्ष नंदन रावल की अध्यक्षता में मंदिर परिसर में हुई बैठक में कहा गया कि अक्सर यह देखा जा रहा है मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पुरोहित आपस में ही जद्दोजहद करते हैं। जिससे श्रद्धालु परेशान रहते हैं। इस तरह के व्यवहार से मंदिर की छवि दूसरे क्षेत्रों में अच्छी नहीं जाती है। पुरोहित मंदिर के भीतर पूजा न कराकर अपने ही आसन पर कराएंगे। तिलक और रक्षा भी अपने ही आसन पर कराएंगे।
शिवलिंग की पूजा के लिए यजमान भीतर ले जाकर पूजा करा सकते हैं। स्थायी आसन किसी भी पुरोहित को नहीं मिलेगा। शाम पांच के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को टीका नहीं लगाया जाएगा। बैठक में तय किया गया कि कोई भी पुरोहित मंदिर परिसर में धूम्रपान, मदिरा और चरस का सेवन नहीं करेगा। यदि कोई पुरोहित परिसर में नशापान करते पाया जाएगा समिति उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाएगी।
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वहां प्रधान पुजारी, चंद्रशेखर जोशी, संजय रावत, दलीप खेतवाल, राजा साह गंगोला, खीमानंद पंत, चंदन गढिय़ा, महिपाल भरड़ा, हेम चंद्र जोशी, कैलाश उपाध्याय, नवीन जोशी, बसंत बल्लभ पांडे, प्रकाश कांडपाल, चंद्र शेखर पांडे और भाष्कर लोहनी आदि शामिल थे।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष नंदन रावल की अध्यक्षता में मंदिर परिसर में हुई बैठक में कहा गया कि अक्सर यह देखा जा रहा है मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पुरोहित आपस में ही जद्दोजहद करते हैं। जिससे श्रद्धालु परेशान रहते हैं। इस तरह के व्यवहार से मंदिर की छवि दूसरे क्षेत्रों में अच्छी नहीं जाती है। पुरोहित मंदिर के भीतर पूजा न कराकर अपने ही आसन पर कराएंगे। तिलक और रक्षा भी अपने ही आसन पर कराएंगे।
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शिवलिंग की पूजा के लिए यजमान भीतर ले जाकर पूजा करा सकते हैं। स्थायी आसन किसी भी पुरोहित को नहीं मिलेगा। शाम पांच के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों को टीका नहीं लगाया जाएगा। बैठक में तय किया गया कि कोई भी पुरोहित मंदिर परिसर में धूम्रपान, मदिरा और चरस का सेवन नहीं करेगा। यदि कोई पुरोहित परिसर में नशापान करते पाया जाएगा समिति उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाएगी।
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वहां प्रधान पुजारी, चंद्रशेखर जोशी, संजय रावत, दलीप खेतवाल, राजा साह गंगोला, खीमानंद पंत, चंदन गढिय़ा, महिपाल भरड़ा, हेम चंद्र जोशी, कैलाश उपाध्याय, नवीन जोशी, बसंत बल्लभ पांडे, प्रकाश कांडपाल, चंद्र शेखर पांडे और भाष्कर लोहनी आदि शामिल थे।