{"_id":"6a188a90333e2b91fe091064","slug":"10-cases-resolved-at-human-rights-commissions-public-hearing-bageshwar-news-c-231-1-bgs1001-125284-2026-05-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bageshwar News: मानवाधिकार आयोग की जनसुनवाई में सुलझाए 10 मामले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bageshwar News: मानवाधिकार आयोग की जनसुनवाई में सुलझाए 10 मामले
Fri, 29 May 2026 12:03 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Fri, 29 May 2026 12:03 AM IST
विज्ञापन
बागेश्वर। उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से दो दिवसीय मानवाधिकार संरक्षण एवं सुशासन के संवेदीकरण पर परिवादों की सुनवाई एवं जागरूकता कार्यक्रम हुआ। आयोग के अध्यक्ष गिरधर सिंह धर्मशक्तू ने अमर उजाला में प्रकाशित दो खबरों का स्वतः संज्ञान लेकर संबंधित विभागों से जवाब-तलब किया है।
बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन जिला भर से आए पीड़ितों और ग्रामीणों की ओर से 120 समस्याओं के परिवाद जमा किए गए। इनमें से 10 गंभीर मामलों का आयोग अध्यक्ष धर्मशक्तू ने कोर्ट के माध्यम से मौके पर ही निस्तारण कर पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान की। शेष मामलों को संबंधित विभागों को भेजकर आख्या मांगी गई है। रिटेनर अधिवक्ता त्रिलोक चंद्र जोशी ने विधिक सेवा प्राधिकरण के क्रियाकलापों की जानकारी दी। उन्होंने देवभूमि में बुजुर्गों का मान, विधिक सेवा का अभियान के तहत वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया।
डालसा सचिव अनीता कुमारी ने घरेलू हिंसा अधिनियम, बाल विवाह निषेध, दहेज को ना कहें अभियान, मानवाधिकारों और संविधान प्रदत्त मूल अधिकारों के विषय में कानूनी बारीकियों से अवगत कराया। शासकीय अधिवक्ता गोविंद बल्लभ उपाध्याय ने बढ़ते नशों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के कड़े प्रावधानों की जानकारी दी। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश रौतेला ने आपसी विवादों को सुलझाने में लोक अदालत और मध्यस्थता के महत्व व लाभों के बारे में बताया। आयोग के अध्यक्ष धर्मशक्तू ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की जानकारी देने के साथ ही वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से मानव जीवन पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों पर डीएफओ, डीएम और ईई लोनिवि से जवाब तलब
बागेश्वर। जिले सुदूरवर्ती और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों की जनसमस्याओं और मानवाधिकारों से जुड़े मामलों को लेकर उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग बेहद सख्त नजर आ रहा है। आयोग के अध्यक्ष गिरधर सिंह धर्मशक्तू ने अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित दो अलग-अलग गंभीर खबरों का स्वतः संज्ञान लिया है। उन्होंने इन मामलों को बेहद चिंताजनक और मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हुए जिले के आला अधिकारियों से विस्तृत आख्या तलब की।
आयोग ने बीते 22 जनवरी को अमर उजाला में प्रकाशित समाचार हाथों में लाठी-दरांती, पीठ पर बस्ते टांग स्कूल पहुंच रही बच्चों की टोली का स्वतः संज्ञान लिया है। पहाड़ों में आए दिन वन्यजीवों के हमलों को वास्तव में चिंताजनक स्थिति मानते हुए आयोग ने डीएफओ से विस्तृत आख्या रिपोर्ट तलब कराई। दूसरे मामले में बीते 17 अप्रेल को प्रकाशित खबर चुनौतियां: न सड़क, न रास्ता, कैसे अस्पताल पहुंचेगी दया का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस स्थिति को अत्यंत दयनीय और मानवाधिकारों के उल्लंघन की परिधि में माना है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने डीएम और ईई लोनिवि कपकोट और ईई पीएमजीएसवाई कपकोट से विस्तृत जांच आख्या तलब की।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को विकास भवन सभागार में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन जिला भर से आए पीड़ितों और ग्रामीणों की ओर से 120 समस्याओं के परिवाद जमा किए गए। इनमें से 10 गंभीर मामलों का आयोग अध्यक्ष धर्मशक्तू ने कोर्ट के माध्यम से मौके पर ही निस्तारण कर पीड़ितों को त्वरित राहत प्रदान की। शेष मामलों को संबंधित विभागों को भेजकर आख्या मांगी गई है। रिटेनर अधिवक्ता त्रिलोक चंद्र जोशी ने विधिक सेवा प्राधिकरण के क्रियाकलापों की जानकारी दी। उन्होंने देवभूमि में बुजुर्गों का मान, विधिक सेवा का अभियान के तहत वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया।
विज्ञापन
डालसा सचिव अनीता कुमारी ने घरेलू हिंसा अधिनियम, बाल विवाह निषेध, दहेज को ना कहें अभियान, मानवाधिकारों और संविधान प्रदत्त मूल अधिकारों के विषय में कानूनी बारीकियों से अवगत कराया। शासकीय अधिवक्ता गोविंद बल्लभ उपाध्याय ने बढ़ते नशों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के कड़े प्रावधानों की जानकारी दी। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश रौतेला ने आपसी विवादों को सुलझाने में लोक अदालत और मध्यस्थता के महत्व व लाभों के बारे में बताया। आयोग के अध्यक्ष धर्मशक्तू ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की जानकारी देने के साथ ही वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से मानव जीवन पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों पर डीएफओ, डीएम और ईई लोनिवि से जवाब तलब
बागेश्वर। जिले सुदूरवर्ती और दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों की जनसमस्याओं और मानवाधिकारों से जुड़े मामलों को लेकर उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग बेहद सख्त नजर आ रहा है। आयोग के अध्यक्ष गिरधर सिंह धर्मशक्तू ने अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित दो अलग-अलग गंभीर खबरों का स्वतः संज्ञान लिया है। उन्होंने इन मामलों को बेहद चिंताजनक और मानवाधिकारों का उल्लंघन मानते हुए जिले के आला अधिकारियों से विस्तृत आख्या तलब की।
आयोग ने बीते 22 जनवरी को अमर उजाला में प्रकाशित समाचार हाथों में लाठी-दरांती, पीठ पर बस्ते टांग स्कूल पहुंच रही बच्चों की टोली का स्वतः संज्ञान लिया है। पहाड़ों में आए दिन वन्यजीवों के हमलों को वास्तव में चिंताजनक स्थिति मानते हुए आयोग ने डीएफओ से विस्तृत आख्या रिपोर्ट तलब कराई। दूसरे मामले में बीते 17 अप्रेल को प्रकाशित खबर चुनौतियां: न सड़क, न रास्ता, कैसे अस्पताल पहुंचेगी दया का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस स्थिति को अत्यंत दयनीय और मानवाधिकारों के उल्लंघन की परिधि में माना है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने डीएम और ईई लोनिवि कपकोट और ईई पीएमजीएसवाई कपकोट से विस्तृत जांच आख्या तलब की।