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40 साल पीछे चले गए बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम
गोपेश्वर/ऋषिकेश/ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jun 2013 04:45 PM IST
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उत्तराखंड में आए कुदरत के कहर ने इंसान से लेकर 'भगवान' तक को नहीं बख्शा है।
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तबाही का आलम यह है कि बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम 40 साल पीछे चले गए हैं।
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बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह और बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है कि ये धाम कब यात्रा शुरू करने लायक हो पाएंगे कहना मुश्किल है। इसके अलावा सभी यात्रा मार्ग बेहद खराब स्थिति में हैं और इन्हें दुरुस्त करने में खासा वक्त लगने वाला है।
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पल भर में सबकुछ बिखर गया
ऐसे में इस साल चारधाम और सिख धर्म के पवित्र तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब की यात्रा भी आगे जारी रहने पर संशय बना हुआ है। मुख्य कार्याधिकारी सिंह ने आहत स्वरों में कहा कि केदरनाथ धाम में अब रह ही क्या गया है। यह तो शमसान घाट में तब्दील हो गया लगता है। बदरीनाथ को मोक्ष का धाम कहते हैं। लेकिन पल भर में सबकुछ बिखर गया है।
तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
यह क्यों और कैसे हुआ, यह सब भगवान की इच्छा है। अब यात्रा कब तक शुरू होगी, यह स्थिति सामान्य होने के बाद ही पता चलेगा। धर्माधिकारी उनियाल ने कहा कि बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने तक रोजाना नियम के अनुसार पूजाएं संपन्न होंगी।
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इस वर्ष बहाल कर पाना असंभव
पीटीआई के अनुसार हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के वाइस चेयरमैन और उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा का कहना है कि इस धाम की यात्रा को इस वर्ष बहाल कर पाना संभव नहीं दिख रहा है।
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अलबत्ता इस बारे में अंतिम निर्णय प्रबंधन ट्रस्ट की बैठक में ही लिया जाएगा। बिंद्रा ने कहा कि पवित्र गुरुद्वारा तो सुरक्षित है। लेकिन मलबा अंदर तक घुस गया है। सेना का राहत और बचाव अभियान भी जारी है।
तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
दूसरी तरफ यात्रा मार्ग विभिन्न स्थानों पर क्षतिग्रस्त हैं, कई पुल टूट चुके हैं और कहीं तो सड़कें पूरी तरह जमींदोज हो गई हैं। बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) क्षति का आंकलन करने के बाद ही मरम्मत शुरू करेगा।
बीआरओ मुख्यालय के अनुसार बदरीनाथ राजमार्ग पर गोविंदघाट ब्रिज, विष्णुप्रयाग हाइड्रो प्रोजेक्ट रूट, श्रीनगर के समीप सिरौंबगड़ में बड़ी क्षति हुई है।
दो पुलों को भारी क्षति
केदारनाथ मार्ग पर रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड के बीच कई स्थानों पर मार्ग और दो पुलों को भारी क्षति हुई है। ऋषिकेश-उत्तरकाशी, गंगोत्री और यमुनोत्री राजमार्ग पर कई स्थानों पर कई सौ मीटर क्षतिग्रस्त हुआ है और कई ब्रिज टूट गए।
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मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर केके राजदान और अधीक्षण अभियंता एके त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार को बदरीनाथ मार्ग को गोविंदघाट तक और उत्तरकाशी मार्ग को धरासू से पांच किमी पहले तक हल्के वाहनों के लिए खोल दिया गया है।
यात्रा मार्गों को पूरी तरह से दुरुस्त करने में वक्त लगेगा। जाहिर है कि इन हालात में चारधाम औक हेमकुंड साहिब की यात्रा इस वर्ष आगे जारी रहने पर संशय बना हुआ है।
पहले पैदल मार्ग खोलने की प्राथमिकता
बीआरओ का कहना है कि जिन स्थानों पर मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, वहां फंसे यात्रियों को निकालने के लिए पहले पैदल मार्ग तैयार करने की प्राथमिकता है, ताकि वह गंतव्य के लिए रवाना हो सकें।
ईंधन पहुंचाने की चुनौती
क्षतिग्रस्त मार्गों और पुलों के निर्माण के लिए बीआरओ के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती ईंधन और रॉ मटेरियल को ऐसे स्थानों तक पहुंचाने की है। सीमा सड़क संगठन का कहना है कि प्राथमिकता के आधार पर माल वाहनों को इन स्थानों तक पास करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इसके बाद निर्माण कार्य द्रुत गति से शुरू कराए जा सकेंगे।