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पांडवखोलि में छी भव्य सुनुक महलक रचना
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, द्वाराहाट (अल्मोड़ा)।
Updated Sun, 09 Oct 2016 11:55 PM IST
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योगदा आश्रम द्वाराहाट की गुफा।
- फोटो : अमर उजाला
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। यां पांडवखोलि में सुनुक महलक भव्य रचना छी। अमर महागुरुमहावतार बाबाजील अपण शिष्य श्यामाचरण लाहिड़ी महाराज कें 1861 में क्रियायोगक दीक्षा दी। आज यां हजारों लोग विग्यानक साधना करणंई। सुनुक महलक रचना बाबाजीक गुफा बटिक 50 मीटर तलि नान मैदान में है छि। यां आज बाबाजीक स्मृति भवन छू। यां हर साल 25 जुलाई हैं स्मृति दिवस मनाई जां।
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श्यामाचरण लाहिड़ी दानापुर एमईएस में कार्यरत छी। 1861 में लाहिड़ीज्यूक बदई यां राणिखेत एमईएस में है गे। बदई आदेश मिलते ही लाहिड़ीज्यू दानापुर बै घ्वाड़ बघ्घील 30 दिनोंक लंब सफर बाद रांणिखेत पुजीं। लाहिड़ी ज्यू आध्यात्मिक प्रवृति आदिम छी और यां एमईएस में तब ज्यादा काम नीं हुंछी, तो लाहिड़ीज्यु आध्यात्मिक आदतल एकांत स्थलों में घुमण हूं निकल जैं छी।
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साधु संतोंक दगै मिलैंछी। एकदिन घूमनै-घूमनै ऊं पाण्डवखोलि, भटकोटाक जंगौव में पुज गईं। यां एक पाथर में ठाड़ एक संतल उनूंकै धात लगै बेर आपण पास बुला। लाहिड़ी ज्यु संतक पास गईं, संत उनुकें एक गुफा भितेर ली गईं। वां उ संतल लाहिड़ी जीकैं प्यारैल देखनै देखनै उनार मुनाव में मांठूमांठ पट्टैक मारि तो लाहिड़ी जीकैं आपण पैल जन्मेकि घटनाक याद ऊंण भै ग्येई।
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उनूकैं याद एगेई कि उनर सामणि जो संत ठाड़ है रईं वीं त महावतार बाबाजी छैं, जो पैल जनम में उनार गुरु छीं, पै जै महावतार बाबाजील उनूंकै बताय कि ऊं य गुफा में रूंछी, लेकिन कैकंणी दिखाई नी दींछी। 33 साल पैली जब त्वील (लाहिड़ीजी) य शरीर छोड़ छी तब बै आज तक मैं तेरी बाट देख रौछीं।
विश्वविख्यात किताब योगीकथामृत में यौ घटनाक बार में विस्तारपूर्वक छपी छू। आपंण गुरू कैं देखि बेर लाहिड़ी महाराज भौतै खुशि हैग्याय। यैक बाद लाहिड़ी महाराजक पैल जन्मैंकि जो भौतै इच्छा छि उकैं पुर करणै लिजी गुरुजील वां एक विशाल सुनुक महलक रचना करि और ब्रह्म बेला में महावतार बाबाजील लाहिड़ी महाराज कैं क्रियायोगक दीक्षा दी।
फिर उ सुनुक महल अदृश्य है गोय। महावतार बाबजील लाहिड़ी ज्यु कैं आदेश दे कि अब त्वील गृहस्थ जीवन में रै बेर सांस्कारिक लोगों कैं क्रियायोगक दीक्षा दिंण छू। क्रियायोगल आदिमों और समाजैकि उत्थानैक जिम्मेदारिकैं पुर करण छू। यौ कामै लिजी मैंल तिकैं चुनौ।
द्वाराहाट। क्रियायोगकि दीक्षा ल्ही बेर जब लाहिड़ी महाराज राणिखेत पुजीं, तब उनकें तार मिलो कि दानापुर बै राणिखेत बदई दुसर मैंसक है छी, गलतील तुमरि है ग्ये। आब तुम दानापुर वापस ऐ जाओ। दानापुर जे बैर लाहिड़ीज्यु सरकारि नौकरी साथ-साथ क्रियायोगक प्रचार में लागी रईं। कई लोगों कैं उनूल क्रियायोगक तरफ जोड़ौ।