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हिमालय के विकास के लिए नई संभावनाएं तलाशे संस्थान : शर्मा
Fri, 05 May 2023 09:12 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 05 May 2023 09:12 PM IST
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अल्मोड़ा के गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल में हुई बैठक में मौ
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अल्मोड़ा। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की दो दिनी 31वीं समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसके दूसरे दिन शुक्रवार को वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष डॉ. एकलव्य शर्मा ने कहा कि हिमालय बहुत बड़ा क्षेत्र है। इसके विकास के लिए संस्थान के पास नई चुनौतियां और संभावनाएं हैं। संस्थान को इन पर कार्य करने की जरूरत है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि हिमालय में जनसंख्या घनत्व बहुत ज्यादा है। इसलिए यहां पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों पर बहुत ज्यादा दबाव है। हिमालयी क्षेत्र में पलायन एक बहुत बड़ी समस्या उभर कर सामने आई है। हमारे पास पहाड़ आधारित विशिष्ट नीति होनी चाहिए ताकि यहां की समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके। हिमालय के लिए हमारा सहयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर का होना चाहिए। हिमालय के विकास के लिए यहां के निवासियों को साथ लेकर काम करने की जरूरत है। उनकी भागीदारी के बिना हिमालय क्षेत्र का विकास संभव नहीं है।
संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील नौटियाल ने वैज्ञानिक सलाहकार समिति को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार से गठित नए मंच नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एप्लीकेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज टू ट्रांसफॉर्म, एडाॅप्ट और बिल्ड रेजिलिएंस (निरंतर) और इसकी संरचना, कार्यप्रणाली के बारे में बताया।
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उन्होंने कहा कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने अपने सभी संस्थानों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी संस्थानों को पुनर्गठित कर एक नया मंच नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एप्लीकेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज टू ट्रांसफॉर्म, एडाप्ट और बिल्ड रेजिलिएंस (निरंतर) नाम से स्थापित करने का फैसला किया है। संस्थान के चारों केंद्राध्यक्षों और क्षेत्रीय केंद्र प्रमुखों ने विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे शोध और विकासात्मक कार्यों को पावर प्वाइंट स्लाइड शो के माध्यम से बताया।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में असम विश्वविद्यालय सिलचर के कुलपति डॉ. राजीव मोहन पंत, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. अरुन कुमार सराफ, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमैंट भोपाल के डॉ. संदीप तांबे, संस्थान के केंद्र प्रमुख किरीट कुमार, डॉ. जेसी कुनियाल, डॉ. आईडी भट्ट, डॉ. परोमिता घोष आदि मौजूद थे।
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डॉ. शर्मा ने कहा कि हिमालय में जनसंख्या घनत्व बहुत ज्यादा है। इसलिए यहां पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों पर बहुत ज्यादा दबाव है। हिमालयी क्षेत्र में पलायन एक बहुत बड़ी समस्या उभर कर सामने आई है। हमारे पास पहाड़ आधारित विशिष्ट नीति होनी चाहिए ताकि यहां की समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके। हिमालय के लिए हमारा सहयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर का होना चाहिए। हिमालय के विकास के लिए यहां के निवासियों को साथ लेकर काम करने की जरूरत है। उनकी भागीदारी के बिना हिमालय क्षेत्र का विकास संभव नहीं है।
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संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील नौटियाल ने वैज्ञानिक सलाहकार समिति को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार से गठित नए मंच नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एप्लीकेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज टू ट्रांसफॉर्म, एडाॅप्ट और बिल्ड रेजिलिएंस (निरंतर) और इसकी संरचना, कार्यप्रणाली के बारे में बताया।
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उन्होंने कहा कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने अपने सभी संस्थानों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी संस्थानों को पुनर्गठित कर एक नया मंच नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एप्लीकेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज टू ट्रांसफॉर्म, एडाप्ट और बिल्ड रेजिलिएंस (निरंतर) नाम से स्थापित करने का फैसला किया है। संस्थान के चारों केंद्राध्यक्षों और क्षेत्रीय केंद्र प्रमुखों ने विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे शोध और विकासात्मक कार्यों को पावर प्वाइंट स्लाइड शो के माध्यम से बताया।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में असम विश्वविद्यालय सिलचर के कुलपति डॉ. राजीव मोहन पंत, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. अरुन कुमार सराफ, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमैंट भोपाल के डॉ. संदीप तांबे, संस्थान के केंद्र प्रमुख किरीट कुमार, डॉ. जेसी कुनियाल, डॉ. आईडी भट्ट, डॉ. परोमिता घोष आदि मौजूद थे।