बारिश न होने से प्याज की पौध बेचने वाले बेचैन
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बारिश नहीं होने के कारण प्याज के पौध विक्रेताओं के चेहरे लटके हुए हैं। तीन माह से बारिश की बूंद नहीं टपकी है जिस कारण लोग प्याज का उत्पादन करने से कतरा रहे हैं। गगास घाटी के पौध विक्रेता दिन भर बाजार में ग्राहकों की खोज में रहते हैं। गगास का प्याज अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले के अलावा गढ़वाल से लगे इलाकों में भी खूब पसंद किया जाता है। इस क्षेत्र के काश्तकार सीजन में दो से तीन लाख रुपए तक की पौध बेच देते थे, इस बार आधा माह का समय बीत गया है, लेकिन अभी तक ग्रामीणों के अधिकांश खेतों से प्याज की पौध तक नहीं निकल पाई है।
शहर से 19 किमी की दूरी पर स्थित गगास घाटी के मकड़ौं, मंगचौड़ा सहित कई इलाकों में व्यापक मात्रा में प्याज की पौध उगाई जाती है। अगस्त और सितंबर में काश्तकार एक से लेकर पांच नाली तक की भूमि में बीज बोते हैं। निराई, गुड़ाई और खरपतवार निकालने के बाद नवंबर की 15 तारीख तक पौध तैयार हो जाती है। ग्रामीण प्याज की पौध सोमेश्वर, गरुड़, बागेश्वर, हवालबाग, अल्मोड़ा, रानीखेत, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, चौखुटिया मुनस्यारी, चंपावत, डीडीहाट, धारचूला आदि क्षेत्रों में बेचते हैं। मंगचौड़ा के काश्तकार खुशाल सिंह ने बताया कि प्याज की खेती वर्षा पर आधारित है। 15 नवंबर से वह लोग प्रतिदिन बाजार में बैठकर प्याज की पौध बेच रहे हैं, लेकिन लोगों में पौध के प्रति पुराना उत्साह नहीं हैं। पिछले वर्षों तक कई काश्तकारों की पौध निपट जाती थी। इस बार पौध खराब होने की आशंका सता रही है।