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पाइपलाइक लीकेज से पेयजल की बर्बादी

Tue, 11 Apr 2017 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)। Updated Tue, 11 Apr 2017 12:21 AM IST
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Waste of drinking water from pipelike leakage
पाइपलाइक लीकेज से पेयजल की बर्बादी - फोटो : अमर उजाला

रानीखेत (अल्मोड़ा)। पेयजल विभाग की महिमा भी निराली है। लोगों से सीधे जुड़े इस विभाग को जनसमस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। लापरवाही का आलम यह है कि गगास-ताड़ीखेत पेयजल पंपिंग योजना के पाइप एक हफ्ते से क्षतिग्रस्त हैं। पानी सड़क पर बह रहा है। 36 गांवों में पानी का संकट गहराया हुआ है। 20 से भी ज्यादा आबादी प्रभावित है। लोगों को प्राचीन स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है लेकिन मौका मुआयना करने के बाद भी अफसर इससे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

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 रानीखेत क्षेत्र के लिए 1971 में गगास नदी से गगास-ताड़ीखेत पेयजल योजना बनी थी। इस योजना से रानीखेत सैन्य क्षेत्र के अलावा ताड़ीखेत ब्लॉक की 36 ग्राम सभाओं की 20 हजार आबादी जुड़ी है। योजना का रखरखाव जल निगम के ऊपर है, जबकि जल संस्थान पानी बांटने का काम करता है।
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वर्ष 2000 में यह योजना अपनी उम्र पूरी कर चुकी है, लेकिन इसका पुनर्गठन तक नहीं हो सका है, हालांकि कुछ साल पूर्व सैन्य क्षेत्र वाले पाइप बदले गए थे, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के पाइप जीर्णशीर्ण हैं, जिसके चलते आए दिन लाइन क्षतिग्रस्त हो जाती है।  
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एक हफ्ते से हल्द्वानी स्टेट हाइवे पर गनियाद्योली के पास एक कलमठ के भीतर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई है। उससे पानी बह रहा है, लेकिन इसे ठीक नहीं किया गया है जबकि जल निगम, जल संस्थान के अधिकारियों ने मौके का संयुक्त निरीक्षण तक कर लिया गया है। आपूर्ति न होने के कारण पिलखोली, गनियाद्योली, ताड़ीखेत, चिलियानौला आदि ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

अफसर बताते हैं कि जल निगम के पास योजना के रखरखाव का जिम्मा है, स्थलीय निरीक्षण करने के बावजूद क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को ठीक नहीं किया जा रहा है। जल संस्थान को जल निगम पर्याप्त पानी की पंपिंग भी नहीं कर रहा है। इस कारण क्षेत्र में हर तीसरे दिन पानी की आपूर्ति की जाती है।


कभी कभार बिजली की समस्या के चलते पंपिंग कम रहती है। अमूमन पर्याप्त पानी जल संस्थान को दिया जा रहा है। क्षतिग्रस्त लाइन को ठीक करने के लिए सड़क खोदनी पड़ेगी। पीडब्ल्यूडी के साथ सहमति बन गई है। 11 अप्रैल से लाइन ठीक करने का काम शुरू हो जाएगा।

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