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धान की पौध बचाने के लिए बर्तनों में पानी ला रहे ग्रामीण
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चौखुटिया (अल्मोड़ा)। खस्ताहाल सिंचाई नहरों का पानी खेतों तक न पहुंचने से किसान धान रोपाई के लिए परेशान हैं। हालत यह हैं कि कहीं किसान बर्तनों में पानी लाकर धान की पौध बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं तो कहीं खुद श्रमदान कर नहर तक पानी पहुंचाने का जुगाड़ कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सिंचाई विभाग ने उन्हें रुलाकर रख दिया है। बार-बार कहने के बावजूद सिंचाई विभाग उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रहा है।
चौखुटिया क्षेत्र में मल्ली गेवाड़ से लेकर तल्ली गेवाड़ तक सिंचाई की अधिकतर नहरों में पानी नही हैं। जिन नहरों में पानी है भी तो उन नहरों का पानी निचले क्षेत्रों में नहीं पहुंच रहा है। शनिवार को मल्ली गेवाड़ के ग्राम पंचायत बौरागांव में लोग धान की पौध बचाने के लिए संघर्ष करते दिखे। ग्राम पंचायत के दीपक फुलारा, सुरेश जोशी, भुवन शर्मा, हेमंत राम, कैलाश कांडपाल, शेखर जोशी, पूरन जोशी, मोहन राम, गोपराम, गिरीश चंद्र आदि का कहना है कि हर तरफ गुहार लगाई गई पर कोई सुध लेने वाला नही है। दिनेश फुलारा का कहना है कि उन्होंने ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी।
इधर धुधलिया बिष्ट के ग्रामीणों ने रामगंगा नदी में श्रमदान कर किसी तरह नहर में पानी पहुंचाया है। खुशाल सिंह अटवाल, शांति देवी, तारा देवी, कमला देवी, मोहनी देवी, पार्वती देवी, भगवत सिंह, हर सिंह, गोपाल सिंह आदि का कहना है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों से भरोसा उठ चुका है उनमें इंसानियत नाम की चीज नही है। बार बार अनदेखी होने पर वह खुद श्रमदान कर नहर में पानी लेकर आए हैं। कुछ ऐसा ही हाल, दीगौत, गनाई, ग्वैलचौड़ा, धुधलिया महर, फुलई, बरलगांव आदि पंचायतों का भी है।
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चौखुटिया क्षेत्र में मल्ली गेवाड़ से लेकर तल्ली गेवाड़ तक सिंचाई की अधिकतर नहरों में पानी नही हैं। जिन नहरों में पानी है भी तो उन नहरों का पानी निचले क्षेत्रों में नहीं पहुंच रहा है। शनिवार को मल्ली गेवाड़ के ग्राम पंचायत बौरागांव में लोग धान की पौध बचाने के लिए संघर्ष करते दिखे। ग्राम पंचायत के दीपक फुलारा, सुरेश जोशी, भुवन शर्मा, हेमंत राम, कैलाश कांडपाल, शेखर जोशी, पूरन जोशी, मोहन राम, गोपराम, गिरीश चंद्र आदि का कहना है कि हर तरफ गुहार लगाई गई पर कोई सुध लेने वाला नही है। दिनेश फुलारा का कहना है कि उन्होंने ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी।
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इधर धुधलिया बिष्ट के ग्रामीणों ने रामगंगा नदी में श्रमदान कर किसी तरह नहर में पानी पहुंचाया है। खुशाल सिंह अटवाल, शांति देवी, तारा देवी, कमला देवी, मोहनी देवी, पार्वती देवी, भगवत सिंह, हर सिंह, गोपाल सिंह आदि का कहना है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों से भरोसा उठ चुका है उनमें इंसानियत नाम की चीज नही है। बार बार अनदेखी होने पर वह खुद श्रमदान कर नहर में पानी लेकर आए हैं। कुछ ऐसा ही हाल, दीगौत, गनाई, ग्वैलचौड़ा, धुधलिया महर, फुलई, बरलगांव आदि पंचायतों का भी है।
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