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पेयजल आपूर्ति सुचारू नहीं होने पर विभिन्न संगठनों ने जताया रोष
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अल्मोड़ा। शहर और आसपास के इलाकों में पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं होने से लोगों में जल संस्थान के खिलाफ आक्रोश है। कई मोहल्लों के लोग नौलों और धारों से पानी लाने के लिए मजबूर हैं। कांग्रेस समेत अन्य संगठनों ने इसके लिए जल संस्थान को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा है कि शासन प्रशासन भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
बारिश के बाद कोसी नदी में बाढ़ आने और ऊपरी इलाकों से गाद के बहकर आने से कोसी नदी में पंप नहीं चल पा रहे हैं। इससे शहर और आसपास के इलाकों को आए दिन पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती है। एक दिन पंपिंग नहीं होने से एक-दो दिन तक पेयजल व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाती है और लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। लोगों को आसपास स्थित जल स्रोतों और धारों से पानी लाकर गुजारा करना पड़ता है। इससे लोगों में जल संस्थान के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।
करोड़ों की लागत से कोसी बैराज और इंटेकवेल बना लेकिन जनता पानी के लिए प्यासी है। सत्तारूढ़ रहे राष्ट्रीय दलों के नेता समस्या का समाधान कम जेब गरम करने में ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। अनेक मोहल्लों और ग्रामीण इलाकों में पेयजल लाइन बिछा दी गई है, लेकिन पानी नहीं मिल रहा है। भाजपा सरकार लगातार जल मूल्य बढ़ा रही है। जिलाधिकारी शीघ्र पेयजल व्यवस्था ठीक करवाएं। - महेश परिहार, राज्य आंदोलनकारी।
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करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता को पानी नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। कई गांवों में घर घर नल योजना में काफी राशि व्यय की जा रही है लेकिन नलों में पानी नहीं आ रहा है। लाइनें बिछाई जा रही हैं और जनता से जलकर वसूला जाएगा, जिसका जनता पर आर्थिक भार पड़ेगा। दोनों विभाग एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं। यदि पेयजल विभाग नहीं चेते तो कांग्रेस आंदोलन को बाध्य होगी। - पीतांबर पांडे, कांग्रेस जिलाध्यक्ष।
कोसी नदी में बाढ़ आने और ऊपरी क्षेत्रों से गाद के साथ ही पानी गंदा आने से अकसर पंपिंग प्रभावित हो रही है। बुधवार कोसी में पंप नहीं चलने से पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी थी। पंपिंग सुचारु होने से शुक्रवार को शहर और आसपास के क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की गई। जाखनदेवी क्षेत्र में खराब वाल्ब को ठीक कर दिया गया है। - केएस खाती, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान अल्मोड़ा।
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बारिश के बाद कोसी नदी में बाढ़ आने और ऊपरी इलाकों से गाद के बहकर आने से कोसी नदी में पंप नहीं चल पा रहे हैं। इससे शहर और आसपास के इलाकों को आए दिन पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पाती है। एक दिन पंपिंग नहीं होने से एक-दो दिन तक पेयजल व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाती है और लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। लोगों को आसपास स्थित जल स्रोतों और धारों से पानी लाकर गुजारा करना पड़ता है। इससे लोगों में जल संस्थान के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।
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करोड़ों की लागत से कोसी बैराज और इंटेकवेल बना लेकिन जनता पानी के लिए प्यासी है। सत्तारूढ़ रहे राष्ट्रीय दलों के नेता समस्या का समाधान कम जेब गरम करने में ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। अनेक मोहल्लों और ग्रामीण इलाकों में पेयजल लाइन बिछा दी गई है, लेकिन पानी नहीं मिल रहा है। भाजपा सरकार लगातार जल मूल्य बढ़ा रही है। जिलाधिकारी शीघ्र पेयजल व्यवस्था ठीक करवाएं। - महेश परिहार, राज्य आंदोलनकारी।
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करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता को पानी नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। कई गांवों में घर घर नल योजना में काफी राशि व्यय की जा रही है लेकिन नलों में पानी नहीं आ रहा है। लाइनें बिछाई जा रही हैं और जनता से जलकर वसूला जाएगा, जिसका जनता पर आर्थिक भार पड़ेगा। दोनों विभाग एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं। यदि पेयजल विभाग नहीं चेते तो कांग्रेस आंदोलन को बाध्य होगी। - पीतांबर पांडे, कांग्रेस जिलाध्यक्ष।
कोसी नदी में बाढ़ आने और ऊपरी क्षेत्रों से गाद के साथ ही पानी गंदा आने से अकसर पंपिंग प्रभावित हो रही है। बुधवार कोसी में पंप नहीं चलने से पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी थी। पंपिंग सुचारु होने से शुक्रवार को शहर और आसपास के क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की गई। जाखनदेवी क्षेत्र में खराब वाल्ब को ठीक कर दिया गया है। - केएस खाती, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान अल्मोड़ा।