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गर्म तेल की कढ़ाई पलटने से ढाई साल का बच्चा जला, रेफर
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अल्मोड़ा। खाना बनाते वक्त रसोई में खेल रहे ढाई साल के मासूम पर गर्म तेल गिर गया। इससे बच्चा बुरी तरह झुलस गया। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल अल्मोड़ा पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
सोमेश्वर क्षेत्र में एक महिला घर में खाना बना रही थी। इस दौरान तेल से भरी कढ़ाई चूल्हे से पलटकर ढाई वर्षीय शौर्य पर गिर गया। तेल गिरने से बच्चा बुरी तरह झुलस गया। परिजन उसे जिला अस्पताल अल्मोड़ा लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे सुशीला तिवारी हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया गया। इमरजेंसी में तैनात डॉ. मोनिका ने बताया कि बच्चा 20 से 25 प्रतिशत तक झुलसा है।
घरेलू उपचार से अस्पताल पहुंचना ज्यादा जरूरी : डॉ. मनीष
अल्मोड़ा। घरों में छोटे बच्चों की देखभाल बहुत जरूरी है। ऐसे में घरों में आग या अन्य ज्वलंत पदार्थों से बच्चों को बचाकर रखने की आवश्यकता है। घटना घटने पर घरेलू नुस्खे के बजाय अस्पताल तुरंत अस्पताल जाने में ही समझदारी है।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष पंत ने बताया कि बच्चों के साथ ऐसी अप्रिय घटना घटने का भय अधिक रहता है। पहले तो बच्चों से एहतियातन ऐसी सामग्री दूर रखी जाए जिससे वह आग की चपेट में आकर झुलस सकते हैं। इसके बावजूद घटना होने पर परिजनों को घबराने की जरूरत नहीं है। पहले तो पीड़ित को सुरक्षित माहौल में लाना होगा। सादे पानी से घाव को हल्के से धोया जा सकता है। बच्चों की त्वचा बहुत मुलायम होती है, ऐसे में इसका भी ध्यान रखना होता है। किसी भी भ्रामकता और घरेलू नुस्खे से बचते हुए पहले अस्पताल का रुख करना चाहिए। हालांकि आलू और गोले का तेल इसमें कारगर है, लेकिन स्वच्छता बहुत जरूरी है। आलू साफ हो तभी उपयोग में लाएं। जलने के मामलों में ड्रेसिंग अलग तरीके की होती है। इसके लिए अस्पताल में ही बेहतर सुविधा मिल सकती है। कंबल का इस्तेमाल बिलकुल न किया जाए।
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सोमेश्वर क्षेत्र में एक महिला घर में खाना बना रही थी। इस दौरान तेल से भरी कढ़ाई चूल्हे से पलटकर ढाई वर्षीय शौर्य पर गिर गया। तेल गिरने से बच्चा बुरी तरह झुलस गया। परिजन उसे जिला अस्पताल अल्मोड़ा लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे सुशीला तिवारी हल्द्वानी के लिए रेफर कर दिया गया। इमरजेंसी में तैनात डॉ. मोनिका ने बताया कि बच्चा 20 से 25 प्रतिशत तक झुलसा है।
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घरेलू उपचार से अस्पताल पहुंचना ज्यादा जरूरी : डॉ. मनीष
अल्मोड़ा। घरों में छोटे बच्चों की देखभाल बहुत जरूरी है। ऐसे में घरों में आग या अन्य ज्वलंत पदार्थों से बच्चों को बचाकर रखने की आवश्यकता है। घटना घटने पर घरेलू नुस्खे के बजाय अस्पताल तुरंत अस्पताल जाने में ही समझदारी है।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष पंत ने बताया कि बच्चों के साथ ऐसी अप्रिय घटना घटने का भय अधिक रहता है। पहले तो बच्चों से एहतियातन ऐसी सामग्री दूर रखी जाए जिससे वह आग की चपेट में आकर झुलस सकते हैं। इसके बावजूद घटना होने पर परिजनों को घबराने की जरूरत नहीं है। पहले तो पीड़ित को सुरक्षित माहौल में लाना होगा। सादे पानी से घाव को हल्के से धोया जा सकता है। बच्चों की त्वचा बहुत मुलायम होती है, ऐसे में इसका भी ध्यान रखना होता है। किसी भी भ्रामकता और घरेलू नुस्खे से बचते हुए पहले अस्पताल का रुख करना चाहिए। हालांकि आलू और गोले का तेल इसमें कारगर है, लेकिन स्वच्छता बहुत जरूरी है। आलू साफ हो तभी उपयोग में लाएं। जलने के मामलों में ड्रेसिंग अलग तरीके की होती है। इसके लिए अस्पताल में ही बेहतर सुविधा मिल सकती है। कंबल का इस्तेमाल बिलकुल न किया जाए।