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ग्रामीणों को पर्यटन व्यवसाय से जोड़ने की कवायद शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Wed, 08 Mar 2017 12:25 AM IST
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tourist shimla
अल्मोड़ा। जिले में पर्यटन व्यवसाय के क्षेत्र में रोजगार की काफी संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार ने ग्रामीण इलाकों में लोगों को व्यक्तिगत रूप से पर्यटन व्यवसाय से जोड़ने के लिए होम-स्टे योजना चलाई है। इसके तहत पर्यटन विभाग ने शासन को पूर्व में 20 गांवों के प्रस्ताव भेजे थे। मावड़ा, जागेश्वर के बाद शासन ने अब मानिला, मजखाली, कसारदेवी में भी इस योजना को मंजूरी दे दी है। पर्यटन विभाग 51 ग्रामीणों को अब तक होम स्टे योजना से जोड़ चुका है। बाहर से आने वाले पर्यटक गांवों में रुकेंगे और इससे ग्रामीणों को आय होगी।
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योजना के तहत व्यक्तिगत रूप से चयनित लाभार्थी को पर्यटक होम-स्टे के लिए कमरे बनवाने हैं। सौ-सौ वर्ग फीट के कम से कम दो कमरों में दो-दो बेड लगने चाहिए। इनमें शौचालय, स्नानागार के साथ सही समुचित प्रकाश, पानी, भोजन की भी व्यवस्था करनी है। इसके लिए लाभार्थी को वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन विकास योजना के तहत बैंक लोन पर पहले दो साल में चार प्रतिशत की दर से ब्याज चुकाना होगा। ब्याज की शेष राशि पर्यटन विभाग वहन करेगा। ताकि ग्रामीण पर्यटन व्यवसाय से जुड़ कर आत्मनिर्भर बन सकें।
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लाभार्थी को उत्तराखंड पर्यटन एवं यात्रा व्यवसाय रजिस्ट्रेशन नियमावली 2014 में इकाई रजिस्ट्रेशन जरूरी है। लाभार्थी को सुख साधन कर, मनोरंजन कर से भी छूट देय है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्या ने बताया कि शासन ने होम स्टे योजना के तहत मवड़ा, जागेश्वर के बाद कसारदेवी, मानिला, मजखाली ग्राम को मंजूरी दे दी। इन गांवों में होम-स्टे योजना के तहत 51 लोगों का रजिस्ट्रेशन किया गया है।
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शासन के निर्देश पर नौ जनवरी 2015 को पर्यटन विभाग ने जागेश्वर, गनेला, चितई पंत, चितई तिवारी, स्याहीदेवी, मानिला, सनड़ा, बसकोट, चौना, छानी-ल्वेशाल, माला, गणानाथ, आरतोला, माड़म, त्याड़ीखान-कालीमठ-कलटिया -कसारदेवी, मल्ली रियूनी-तल्ली रियूनी, शिलंगी-उपराड़ी-भड़गांव, डभरा-सौंराल-चरी, खोल्यों-क्यारी, डोल-नाटाडोल-भांगादेवली गांवों का चयन कर प्रस्ताव पर्यटन निदेशालय को भेजा था।