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भवनों का क्या करेंगे, डाक्टर दो
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sat, 30 Jul 2016 10:45 PM IST
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अल्मोड़ा का जिला अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
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अलग राज्य बनने के बाद से सरकारें स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने का दावा करती रही हैं, लेकिन हालत इसके विपरीत हैं। अपग्रेड के नाम पर अस्पतालों के नए भवन तो बन गए, लेकिन डाक्टर पहले से भी कम हो गए। हालत यह है कि जिले के सभी अस्पतालों में डाक्टरों के 266 पद सृजित हैं, लेकिन इसमें से सिर्फ 117 डाक्टर ही कार्यरत हैं और 149 पद खाली हैं। जिला मुख्यालय के अस्पतालों में हृदय रोग विशेषज्ञ सहित तमाम अन्य विशेषज्ञ डाक्टर नहीं हैं। मरीजों को इलाज के लिए हल्द्वानी और अन्य स्थानों में जाना पड़ता है।
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जिला मुख्यालय में जिला अस्पताल, बेस और महिला अस्पताल के अलावा रानीखेत में जिला स्तर का नागरिक अस्पताल और विभिन्न विकासखंडों में आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा चार ब्लाकों में पीएचसी हैं। इसके अलावा 20 एडिशनल पीएचसी और एसएडी भी हैं, लेकिन इतनी भारी संख्या में अस्पताल होने के बावजूद डाक्टरों के पद पहले से भी कम होते जा रहे हैं।
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जिले के सभी अस्पतालों में डाक्टरों के कुल 266 पद सृजित हैं, लेकिन इनमें सिर्फ 117 पदों पर ही डाक्टर तैनात हैं। जिले में 21 डाक्टर संविदा में कार्यरत हैं। इनमें कुछ सेवानिवृत्त डाक्टर भी शामिल हैं। जिला और बेस अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों के अलावा आकस्मिक डाक्टरों के पद भी खाली हैं।
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जिससे वरिष्ठ डाक्टरों को आकस्मिक डाक्टरों की जगह भी काम करना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों से रोगी जिला मुख्यालय में स्थित जिला, बेस और महिला अस्पतालों तक पहुंचते हैं, लेकिन संसाधनों और विशेषज्ञ डाक्टरों के अभाव में गंभीर रोगियों को इलाज के लिए हल्द्वानी और अन्य सेंटरों को भेज दिया जाता है। स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय के किसी भी अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। जिससे कई बार रोगियों की असमय हार्ट की बीमारी से मौत होती रहती है।