अल्मोड़ा: बाघ ने टेक्नोलॉजी को भी दी चुनौती, ड्रोन-कैमरे फेल, वन विभाग की सारी तकनीक बेअसर; ग्रामीणों में दहशत
तड़म क्षेत्र में एक सक्रिय बाघ वन विभाग की कोशिशों के बावजूद पकड़ में नहीं आ रहा है। बाघ को काबू करने के लिए विभाग ने दो ड्रोन, दो लाइव कैमरे, करीब 40 कैमरा ट्रैप और 9 रेस्क्यू पिंजरे लगाए हैं, लेकिन बाघ इन सभी हाईटेक इंतजामों को चकमा दे रहा है।
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अल्मोड़ा जिले के मौलेखाल के तड़म क्षेत्र में लगातार सक्रिय बाघ वन विभाग की हाईटेक निगरानी और रेस्क्यू इंतजामों को भी चकमा दे रहा है। बाघ की तलाश में दो ड्रोन, दो लाइव कैमरे और करीब 40 कैमरा ट्रैप और नौ रेस्क्यू पिंजरे भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद बाघ अब तक पकड़ में नहीं आया है। बाघ की लगातार मौजूदगी से क्षेत्र में ग्रामीणों की दहशत बरकरार है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और बाघ के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए वन विभाग ने तड़म क्षेत्र में निगरानी अभियान जारी है। ग्राम सभा तड़म में रेस्क्यू पिंजरा लगाने के साथ ही बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दो ड्रोन, दो लाइव कैमरे और करीब 40 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रेस्क्यू अभियान में छह एनक्लोजर, सात फोकस लाइट, राइफल और ट्रैंक्विलाइजर गन समेत अन्य सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाघ को पकड़ने के लिए क्षेत्र में कुल नौ रेस्क्यू पिंजरे लगाए गए हैं। टीमें संभावित स्थानों पर लगातार निगरानी कर बाघ की गतिविधियों को ट्रैक कर रही हैं।
डबरा-सौराल, तड़म और काट की नाव में सतर्कता
मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए मोहान वन क्षेत्र के डबरा-सौराल, तड़म और काट की नाव क्षेत्र में उप प्रभागीय वनाधिकारी रानीखेत के नेतृत्व में गठित टीमें लगातार कैंप कर रही हैं। दिन के साथ रात में भी गश्त और निगरानी की जा रही है। तड़म और डबरा-सौराल ग्राम सभाओं के रास्तों और पगडंडियों के आसपास झाड़ियों की कटाई भी कराई जा रही है। वन विभाग की डॉक्टर टीम भी रेस्क्यू टीम के साथ बाघ को सुरक्षित पकड़ने के प्रयास में जुटी है।
दूसरे रेंज की टीमों ने भी डेरा डाला
अल्मोड़ा और जौरासी रेंज की टीमें भी क्षेत्र में कैंप कर निगरानी, गश्त और जागरूकता अभियान में सहयोग कर रही हैं। ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए गांवों में पोस्टर लगाए जा रहे हैं और लाउडस्पीकर से जागरूक किया जा रहा है। जनजागरूकता गोष्ठियां भी आयोजित की जा रही हैं।
बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। गश्ती और निगरानी टीमें लगातार पिंजरों, कैमरा ट्रैप और अन्य उपकरणों की जांच कर रही हैं। बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू करने के लिए कॉर्बेट की विशेषज्ञ टीम का भी सहयोग लिया जा रहा है। परिस्थितियों के अनुसार रेस्क्यू अभियान आगे बढ़ाया जाएगा। -काकुल पुंडीर, एसडीओ, वन विभाग