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जैव विविधता पर मंडरा रहे खतरों को गंभीरता से लेना होगा
Tue, 05 Feb 2019 11:06 PM IST
Almora desk
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Published by: Almora desk
Updated Tue, 05 Feb 2019 11:06 PM IST
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कार्यशाला में मौजूद विशेषज्ञ।
- फोटो : अमर उजाला
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जीबी पंत संस्थान में राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन द्वारा आयोजित द्वितीय राष्ट्रीय परियोजना मूल्यांकन एवं अनुश्रवण कार्यशाला में जैव विविधता संरक्षण एवं प्रबंधन और आजीविका संवर्धन से जुड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने सतत विकास की अवधारणा पर काम करते हुए हिमालयी राज्यों में जैव विविधता पर मंडरा रहे खतरों को गंभीरता से लेने पर जोर दिया।
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इस दौरान 30 से अधिक भारतीय हिमालयी राज्यों में संचालित परियोजनाओं का विशेषज्ञों ने तकनीकी सत्रों में मूल्यांकन किया और परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट देखने के बाद महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। विशेषज्ञों ने कहा कि आजीविका संवर्धन और रोजगार से जुड़े विषय के अभाव में यहां के प्राकृतिक संसाधनों का भी दोहन होता है। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं के द्वारा सेब की उन्नत प्रजातियों को बढ़ावा देने, मौन संग्रहालय बनाने, वन्य जीवों की गणना कर मानव के साथ उनके संघर्ष को कम करने के नए मॉडल विकसित करने, 16 वन्य उत्पादों से विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद बनाकर प्रस्तुत करने वाली परियोजनाओं के कार्य देखे और सराहना की।
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डॉ. वीके गौड़, पद्मश्री डॉ शेखर पाठक, प्रो. एसपी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशालाओं में परियोजनाओं का मूल्यांकन डॉ. ललित कपूर, डॉ. डीसी उप्रेती , जीबी पंत संस्थान के निदेशक डॉ. आरएस रावल, डॉ.आर नागराजा, प्रो. एसके मिश्रा, एके सराफ, डॉ वरूण जोशी, डॉ. वीएम चौधरी, इंजीनियर किरीट कुमार, जेके गर्ग, डॉ. अनीता पांडे, सोनाली बिष्ट, डॉ. पीपी डबराल आदि ने किया।
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नोडल अधिकारी राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन किरीट कुमार ने बताया कि कार्यशाला में विशेषज्ञ जटिल मुद्दों और चुनौतियों पर भी चर्चा करेंगे। कार्यशाला में कोलकाता से बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, चिया नैनीताल, भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून, जीबी पंत कृषि विवि पंतनगर, गढ़वाल , सिक्किम, शेर-ए कश्मीर श्रीनगर विवि के अलावा आईआईटी जम्मू, हिमाचल, केंद्रीय विश्वविद्यालय पंजाब, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एज्यूकेशन पश्चिम बंगाल ने परियोजना की प्रगति प्रस्तुत की। यूकॉस्ट से जुड़े हार्क, इनहेयर, आदि की ओर से उत्पादों और कार्यों के स्टॉल भी लगाए गए।