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Almora News: राज्य आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ शुरू की तीन दिनी रथ यात्रा
Fri, 10 Mar 2023 11:04 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 10 Mar 2023 11:04 PM IST
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अल्मोड़ा। छूटे राज्य आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण करने समेत अन्य मांगें पूरी न होने से नाराज उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ शुक्रवार को चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में धरना दिया। इसके सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए यहां से तीन दिवसीय रथयात्रा निकाली।
इस मौके पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि राज्य बनने के बाद जहां विधायकों का वेतन कई गुना बढ़ गया है वहीं राज्य आंदोलनकारियों को सम्मान जनक पेंशन मिलना तो दूर छूटे राज्य आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण तक नहीं हो पा रहा है। इससे वह अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। राज्य आंदोलनकारियों के आश्रित दर- दर भटक रहे हैं। आम जनता बंदरों, सुअरों आवारा जानवरों से परेशान हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है। सरकारी नौकरियों के द्वार आम युवाओं के लिए बंद हैं। विकास योजनाओं के धन में निरंतर कटौती हो रही है। छोटे- छोटे कार्यों में राजनैतिक हस्तक्षेप हो रहा है जिससे विकास में भारी असंतुलन पैदा हो गया है। पलायन लगातार बढ़ रहा है। परिणामस्वरूप पहाड़ के गांव जन शून्यता की ओर बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद सरकार जाग नहीं रही है। रथ यात्रा चितई, पेटशाल, बाड़ेछीना, पनुवानौला, आरतोला-गुरड़ाबांज, काफलीखान, धौलादेबी होते हुए दन्या तक गई। 11 मार्च को यात्रा कपड़खान, बसौली, ताकुला, सोमेश्वर, बिंता होते हुए द्वाराहाट जाएगी। 12 मार्च को चौखुटिया, मासी, भिकियासैंण, भतरौंजखान, रानीखेत होते हुए अल्मोड़ा पहुंच कर संपन्न होगी।
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रथयात्रा, धरने में ये रहे शामिल
रथयात्रा में ब्रह्मानंद डालाकोटी, महेश परिहार, शिवराज बनौला, दौलत सिंह बगड़वाल, देवनाथ, खड़क सिंह मेहता, मोहन भैसोड़ा, हेम जोशी, दिनेश शर्मा, बहादुर राम, लछम सिंह, गोपाल बनौला, कुंदन सिंह, कृष्णानंद पांडे, तारा भट्ट, सुंदर राम, कैलाश राम, तारा राम, तारा तिवारी, बसंत बल्लभ जोशी, विशंभर पेटशाली, डुंगर रावत, रघुनंदन पपनै, पूरन बनौला, सुंदर सिंह आदि शामिल रहे।
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इस मौके पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि राज्य बनने के बाद जहां विधायकों का वेतन कई गुना बढ़ गया है वहीं राज्य आंदोलनकारियों को सम्मान जनक पेंशन मिलना तो दूर छूटे राज्य आंदोलनकारियों का चिह्नीकरण तक नहीं हो पा रहा है। इससे वह अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। राज्य आंदोलनकारियों के आश्रित दर- दर भटक रहे हैं। आम जनता बंदरों, सुअरों आवारा जानवरों से परेशान हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है। सरकारी नौकरियों के द्वार आम युवाओं के लिए बंद हैं। विकास योजनाओं के धन में निरंतर कटौती हो रही है। छोटे- छोटे कार्यों में राजनैतिक हस्तक्षेप हो रहा है जिससे विकास में भारी असंतुलन पैदा हो गया है। पलायन लगातार बढ़ रहा है। परिणामस्वरूप पहाड़ के गांव जन शून्यता की ओर बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद सरकार जाग नहीं रही है। रथ यात्रा चितई, पेटशाल, बाड़ेछीना, पनुवानौला, आरतोला-गुरड़ाबांज, काफलीखान, धौलादेबी होते हुए दन्या तक गई। 11 मार्च को यात्रा कपड़खान, बसौली, ताकुला, सोमेश्वर, बिंता होते हुए द्वाराहाट जाएगी। 12 मार्च को चौखुटिया, मासी, भिकियासैंण, भतरौंजखान, रानीखेत होते हुए अल्मोड़ा पहुंच कर संपन्न होगी।
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रथयात्रा, धरने में ये रहे शामिल
रथयात्रा में ब्रह्मानंद डालाकोटी, महेश परिहार, शिवराज बनौला, दौलत सिंह बगड़वाल, देवनाथ, खड़क सिंह मेहता, मोहन भैसोड़ा, हेम जोशी, दिनेश शर्मा, बहादुर राम, लछम सिंह, गोपाल बनौला, कुंदन सिंह, कृष्णानंद पांडे, तारा भट्ट, सुंदर राम, कैलाश राम, तारा राम, तारा तिवारी, बसंत बल्लभ जोशी, विशंभर पेटशाली, डुंगर रावत, रघुनंदन पपनै, पूरन बनौला, सुंदर सिंह आदि शामिल रहे।
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