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राज्य बनने के बाद बुरे हाल में ऊनी वस्त्रों की फैक्ट्री
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Wed, 14 Dec 2016 10:42 PM IST
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अल्मोड़ा की रिवर व्यू फैक्ट्री।
- फोटो : अमर उजाला
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खादी ग्रामोद्योग के क्षेत्र में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा तमाम योजनाएं चलाने की बात की जा रही है, लेकिन धरातल में हालत कुछ और है। अल्मोड़ा के छावनी क्षेत्र में गांधी जी की प्रेरणा से 1937 में स्थापित स्थित खादी और ऊनी वस्त्रों की रीवर व्यू फैक्ट्री की दशा राज्य बनने के बाद और भी खराब हो गई है। हालत यह है कि कभी इस फैक्ट्री में 80 से अधिक कर्मचारी कार्यरत थे पर आज यह संख्या घटकर 30 हो गई है। तमाम संभावनाओं के बावजूद सरकारी उपेक्षा के चलते इस उद्योग में ऊनी वस्त्रों का उत्पादन पहले से कम होता जा रहा है।
महात्मा गांधी की प्रेरणा से अल्मोड़ा के छावनी इलाके में खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अंतर्गत 1937 में हाथ से बने खादी और ऊनी वस्त्रों के उत्पादन के लिए एक उद्योग की स्थापना की गई। छावनी क्षेत्र में जिस स्थान पर यह फैक्ट्री स्थित है वहां से कोसी नदी दिखाई पड़ती है इसलिए इस स्थान को रिवर व्यू भी कहा जाता है। आजादी से पहले से ही इसे रीवर व्यू फैक्ट्री के नाम से जाना जाता है। आजादी के बाद भी संयुक्त उत्तर प्रदेश के शासन में काफी दिनों तक यह फैक्ट्री अच्छी चली और उस दौर में इसका उत्पादन डेढ़ करोड़ रुपए सालाना तक हुआ करता था। इसी परिसर में खादी ग्रामोद्योग का कुमाऊं स्तर का क्षेत्रीय कार्यालय भी है और यहां से खादी और ऊनी वस्त्रों के उत्पादन के लिए पूरे कुमाऊं के
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अन्य छोटे उत्पादन केंद्रों को भी बढ़ावा दिया जाता था।
राज्य बनने से पहले एक समय अल्मोड़ा फैक्ट्री के अलावा कपकोट, बागेश्वर, धारचूला, मुनस्यारी, नैनीताल आदि जगहों पर स्थित उत्पादन केंद्रों में कुल 84 पूर्णकालिक कर्मचारी काम करते थे। इसके अलावा कई लोगों को अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिलता था, लेकिन राज्य बनने के बाद कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बजाय और भी कम हो गई है। दरअसल फैशन और जमाना बदलने के साथ वस्त्रों के उत्पादन में नए डिजाइनों आदि का इस्तेमाल नहीं किया गया। तमाम संभावनाओं के बावजूद सरकारों ने खादी और ऊनी वस्त्रों के इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीतियां भी नहीं बनाई जिससे स्थिति पहले से भी बिगड़ गई। हालांकि आज भी यहां का उत्पादित माल काफी प्रसिद्ध है लेकिन उत्पादन में खास बढ़ोतरी नहीं होने से बीते 15-16 सालों में जो भी कर्मचारी रिटायर हुए उनके स्थान पर नए कर्मचारी नहीं रखे गए। आज इस उद्योग में कर्मचारियों की संख्या सिर्फ 30 में सिमट गई है।
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इन चीजों का उत्पादन होता है इस उद्योग में
अल्मोड़ा। रीवर व्यू फैक्ट्री में खास तौर पर गर्म कोट, शॉल, स्वेटर, वास्केट, पंखी, चुटके, थुलमे आदि का उत्पादन होता है। आज भी यहां का उत्पादित माल गांधी आश्रम और कई अन्य खादी भंडार में भेजा जाता है। इसके अलावा कई प्राइवेट संस्थाएं भी यहां से सामान खरीदती हैं। कई लोग आज भी खुद फैक्ट्री में आकर गर्म कपड़ा पसंद करते हैं और यहां काम करने वाले कुशल टेलर से कोट, वास्केट आदि बनवाते हैं। यहां स्थित केंद्र से सभी तरह के सामान की बिक्री भी होती है।