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यहां नहीं चलेगा सोशल मीडिया, पैदल चलना ही होगा
Wed, 20 Mar 2019 09:18 PM IST
Almora desk
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Published by: Almora desk
Updated Wed, 20 Mar 2019 09:18 PM IST
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- फोटो : pexels.com
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पहाड़ में इंटरनेट यूजरों की संख्या उंगली में गिनने लायक है। खासकर अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की अधिकतर जनसंख्या गांवों में निवास करती है जहां इंटरनेट की पहुंच नहीं है। इंटरनेट तो दूर ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीफोन अक्सर खराब रहते हैं और मोबाइल फोन में सिगनल की समस्या बनी रहती है। इसलिए यहां से सांसद का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को सोशल मीडिया का सहारा लेने की जगह पैदल जनसंपर्क पर निर्भर रहना होगा।
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चार जिलों अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत में बीएसएनएल के ढाई लाख उपभोक्ता हैं। इनमें मात्र 5800 इंटरनेट यूजर हैं जो कि शहरी क्षेत्र के निवासी हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीएसएनएल के उपभोक्ताओं की संख्या एक लाख 90 हजार थी और तब इंटरनेट सेवा का उपयोग करने वाले 3827 उपभोक्ता थे।
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पांच साल बाद भी संख्या बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है। हालांकि लोगों को इंटरनेट सुविधा देने के लिए इस बार बीएसएनएल ने भारत नेट के तहत 434 ग्राम पंचायतों में से 400 में आप्टिकल फाइबर लगा दिया है। इनमें अल्मोड़ा में ताकुला, हवालबाग, बागेश्वर में बागेश्वर ब्लॉक और चंपावत में लोहाघाट ब्लॉक में आप्टिकल फाइबर लाइन बिछा दी गई है। करीब 13 लाख से अधिक मतदाताओं वाली संसदीय सीट में प्रत्याशियों को सोशल मीडिया की जगह पैदल जनसंपर्क पर भरोसा करना होगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां इंटरनेट की सुविधा न के बराबर है प्रत्याशियों को काफी मेहनत करनी होगी।
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