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नहीं बच सका शिलापट
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा।
Updated Mon, 02 Nov 2015 11:27 PM IST
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नानीसार में जिंदल ग्रुप द्वारा निर्माणाधीन अंतर्राष्ट्रीय विद्यालय के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा किए गए शिलान्यास का पट प्रदर्शनकारियों द्वारा तोड़े जाने को खुफिया तंत्र की विफलता माना जा रहा है।
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खुफिया तंत्र वहां पहुंचने वाले आंदोलनकारियों की संख्या का सही अनुमान नहीं लगा सका। जिससे वहां काफी कम फोर्स तैनात की गई थी और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रण करने में पुलिस प्रशासन पूरी तरह से विफल रहा।
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मालूम हो कि नानीसार में 353 नाली सरकारी जमीन को जिंदल ग्रुप को देने का स्थानीय ग्रामीणों के अलावा उपपा और कई अन्य संगठन लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इससे ग्रामीणों का गौचर और पनघट आदि प्रभावित होगा। जबकि उन्हें कोई खास लाभ नहीं मिलने वाला है।
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लोगों ने बीते दिनों शिलान्यास करने पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत का भी विरोध किया था। उस दिन कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। उसके बाद उपपा और सहयोगी संगठनों ने एक नवंबर को नानीसार चलो का नारा देकर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था।
रणनीति के मुताबिक रविवार को मौके पर सैकड़ों लोग एकत्र हो गए। कुछ स्थानीय ग्रामीणों के अलावा अल्मोड़ा सहित उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों से भी संगठनों के लोग मौके पर पहुंच गए। बताया जाता है है कि खुफिया तंत्र की विफलता के कारण पुलिस प्रशासन वहां पहुंचने वाले प्रदर्शनकारियों की संख्या का अनुमान नहीं लगा सका।
वहां रानीखेत के एसडीएम, कोतवाल और द्वाराहाट के थानाध्यक्ष के अलावा लगभग 15-20 पुलिस कर्मी ही तैनात थे। यही नहीं रविवार सुबह से मौके पर प्रदर्शनकारी पहुंचने शुरू हो गए। उनकी तादात को देखते हुए भी मौके पर तत्काल अतिरिक्त फोर्स नहीं मंगाई गई।
इसका परिणाम यह हुआ कि प्रदर्शनकारियों ने मौके पर सीएम के शिलान्यास पट को तोड़ दिया। बताया जाता है कि प्रदर्शनकारियों के बीच में से ही एक वर्ग ने उग्र हो रहे लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। यह माना जा रहा है कि सूचना तंत्र विफल नहीं होता और पुलिस प्रशासन की सही तैयारियां होती तो शिलान्यास पट को तोड़ने से बचाया जा सकता था।