शैलेश ने अमेरिका में जीते पांच लाख डालर
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वैज्ञानिक से उद्यमी बने जिले के तल्ला ज्लूया (मनान) निवासी शैलेश उप्रेती ने न्यूयार्क (अमेरिका) में हुई प्रतियोगिता में पांच लाख डालर का ईनाम जीता है। शैलेश की उपलब्धि से उनके घर और गांव में जश्न का माहौल है। उनके घर पर माता-पिता और बहन को बधाइयां देने वालों का तांता लगा हुआ है।
मनान के समीप तल्ला ज्लूया गांव में 25 सितंबर 1978 को पूर्व प्रधानाचार्य रेवाधर उप्रेती और चंद्रकला उप्रेती के यहां जन्मे शैलेश की कक्षा पांच तक की शिक्षा दिल्ली में चाचा के यहां हुई। इसके बाद उन्होंने कक्षा छह से 11 तक जीआईसी बागेश्वर में पढ़ाई की। पिता का जीआईसी भगतोला में तबादला होने पर इंटरमीडिएट जीआईसी भगतोला से किया। 1992 में हाईस्कूल 59 फीसदी और इंटरमीडिएट 1994 में 62 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण किया। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा से 1997 में बीएससी 74 फीसदी और 1999 में एमएससी 86 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण किया और एमएससी में टॉपर रहे। इसके बाद उन्होंने नेट और गेट परीक्षा उत्तीर्ण की। 2005 में आईआईटी दिल्ली से पीएचडी आयल एंड पालीमर विषय में की। 2006 में शैलेश अमेरिका चले गए।
गत दिवस न्यूयार्क में हुई प्रतियोगिता में 12 देशों की 176 कंपनियों ने भाग लिया। जिसमें शैलेश उप्रेती की स्वयं की कपंनी ने पांच लाख डालर ईनाम जीता है। ईनाम जीतने के बाद शैलेश ने अपने पिता से फोन पर बात की और यह खुशखबरी दी। वर्तमान में तल्ला ज्यूला गांव से करीब दो किमी दूर अल्मोड़ा-सोमेश्वर मार्ग में मनान में शैलेश के पिता सेवानिवृत्त पूर्व प्रधानाचार्य रेवाधर उप्रेती ने नया घर बनाया है। गांव के पुस्तैनी मकान को छोड़कर अब उनका परिवार इसी मकान में रहता है। घर पर उनके पिता, माता और छोटी बहन चंपा उप्रेती रहती हैं। चार भाई-बहनों में सबसे बड़े शैलेश के छोटे भाई अशोक उप्रेती राजकीय महाविद्यालय काशीपुर में शिक्षक हैं। एक विवाहिता बहन रेखा तिवारी हैं। शैलेश का ससुराल भिकियासैंण में है। उनका 2009 में विवाह हुआ। उनकी पत्नी विंध्या उप्रेती और डेढ़ साल की पुत्री माइरा उप्रेती उनके साथ अमेरिका में ही रहती हैं।
बीस घंटे से अधिक बैकअप वाली बैटरी बनाई शैलेश ने
सोमेश्वर। शैलेश उप्रेती ने 2013 में अमेरिका में सीसीसीवी वेलिंगटन न्यूयार्क कंपनी की स्थापना की। यह कंपनी बैटरी का निर्माण करती है। शैलेश की कंपनी द्वारा निर्मित की जाने वाली बैटरी 20 से 22 घंटे का बैकअप देती हैं। शैलेश के पिता रेवाधर उप्रेती ने बताया कि इसके लिए शैलेश की कंपनी को यह पुरस्कार मिला है।