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तुम फिर निराश हो और रोज ही तो मिलता है उसे घर के आंगन में बाघ
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शब्दोत्सव के तहत कविता प्रस्तुत करतीं डॉ. विनीता खाती। संवाद
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। शब्दोत्सव के तहत सोमवार को यहां सुभाष चौक में काव्य गोष्ठी हुई। इसमें कवियों ने कविताओं के माध्यम से अंकिता हत्याकांड समेत सामाजिक कुरीतियों पर भी जमकर प्रहार किए।
यहां आयोजित काव्य गोष्ठी की शुरुआत युवा कवयित्री प्रीति जोशी ने नैनीझील एक दिन और किसी अपने से हाथ.. जैसी भावपूर्ण रचनाओं से की। उदीयमान कवयित्री अंकिता पंत ने कहा - चाहते तो सब हैं.. और किस बात की कमी है जो गम का माहौल बना रहे हो..। एडवोकेट दिनेश तिवारी ने कहा - तुम फिर उदास हो, तुम फिर निराश हो और रोज ही तो मिलता है उसे घर के आंगन में बाघ..।
मीना पांडे ने कहा - 76 वर्ष की तरुणाई में डगमग पग से डोल रही हूं। अंकिता हत्याकांड के संदर्भ में उमा जोशी ने कहा - मानव रूप भक्षक को देखा..। स्त्री की सामाजिक पारिवारिक वर्जनाओं पर डॉ. विनीता खाती ने कहा - सुनी आंखें, बिखरे केश.. अतीत के पन्ने पलट कर देखती हूं। गीता जोशी ने पहाड़ की स्त्री कविता का वाचन किया। रचनाकार कृष्ण कुमार सती ने तुम से सीखा सब कुछ मैंने, क्यों कि तुम माता हो’ और कुमाउनी कविता सबौ भर छू हमर पहाड़.. से सबको प्रभावित किया। कवि राजेंद्र प्रसाद पंत, नीरज फर्त्याल आदि ने भी कविताएं सुनाईं। कार्यक्रम का संचालन कर रहे रंगकर्मी, पत्रकार विमल सती ने पलायन का दर्द और रानीखेत शहर के निरंतर ह्रास संबंधी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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यहां आयोजित काव्य गोष्ठी की शुरुआत युवा कवयित्री प्रीति जोशी ने नैनीझील एक दिन और किसी अपने से हाथ.. जैसी भावपूर्ण रचनाओं से की। उदीयमान कवयित्री अंकिता पंत ने कहा - चाहते तो सब हैं.. और किस बात की कमी है जो गम का माहौल बना रहे हो..। एडवोकेट दिनेश तिवारी ने कहा - तुम फिर उदास हो, तुम फिर निराश हो और रोज ही तो मिलता है उसे घर के आंगन में बाघ..।
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मीना पांडे ने कहा - 76 वर्ष की तरुणाई में डगमग पग से डोल रही हूं। अंकिता हत्याकांड के संदर्भ में उमा जोशी ने कहा - मानव रूप भक्षक को देखा..। स्त्री की सामाजिक पारिवारिक वर्जनाओं पर डॉ. विनीता खाती ने कहा - सुनी आंखें, बिखरे केश.. अतीत के पन्ने पलट कर देखती हूं। गीता जोशी ने पहाड़ की स्त्री कविता का वाचन किया। रचनाकार कृष्ण कुमार सती ने तुम से सीखा सब कुछ मैंने, क्यों कि तुम माता हो’ और कुमाउनी कविता सबौ भर छू हमर पहाड़.. से सबको प्रभावित किया। कवि राजेंद्र प्रसाद पंत, नीरज फर्त्याल आदि ने भी कविताएं सुनाईं। कार्यक्रम का संचालन कर रहे रंगकर्मी, पत्रकार विमल सती ने पलायन का दर्द और रानीखेत शहर के निरंतर ह्रास संबंधी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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