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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Sericulture become a source of income for villagers

रेशम उत्पादन बनेगा ग्रामीणों की आय का जरिया

Thu, 01 Sep 2016 10:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा। Updated Thu, 01 Sep 2016 10:27 PM IST
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 जिले में रेशम उत्पादन ग्रामीणों की आय का जरिया बनेगा। रेशम विभाग अब मनरेगा योजना के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में शहतूत के पौधों का रोपण करा रहा है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक 200 एकड़ क्षेत्र में शहतूत के पौधों का रोपण किया जा चुका है। 

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सोमेश्वर घाटी, जैंती, लमगड़ा, स्याल्दे घाटी और हवालबाग ब्लॉक के खूंट आदि क्षेत्रों की जलवायु रेशम उत्पादन के लिए मुफीद है। पूर्व में कलस्टर विकास योजना के तहत विभाग काश्तकारों को शहतूत के पौधे लगाने के साथ ही ग्रामीणों को कीट पालन सामग्री, कीट गृह, कीट आदि उपलब्ध कराता था, लेकिन 2013 में यह योजना बंद हो गई।
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रेशम उत्पादन को ग्रामीणों की आय का जरिया बनाने के लिए मनरेगा योजना से शहतूत के पौधों का रोपण शुरू किया गया है।

दिसंबर और जुलाई में शहतूत के पौधों का रोपण किया जाता है। विभाग ने स्याल्दे ब्लॉक के पालपुर, विरोट, लमगड़ा ब्लॉक के सिरौनियां, माल्ता उज्यौला, जैंती क्षेत्रों पिछले साल 80 एकड़, जबकि गत जुलाई में 120 एकड़ क्षेत्र में शहतूत के पौधों का रोपण करवाया है। विभाग काश्तकारों को शहतूत के पौधे निशुल्क उपलब्ध करवा रहा है। इन क्षेत्रों में 36 हजार पौधे रोपित किए जा चुके हैं।
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सिल्क बोर्ड के डा. एके कांत ने रेशम विभाग के अधिकारियों के साथ पिछले दिनों इन क्षेत्रों का निरीक्षण किया। सहायक निदेशक रेशम अरविंद पांडे ने बताया कि तीन सालों में शहतूत की पत्तियों से रेशम का उत्पादन शुरू हो जाता है। इन इलाकों में काश्तकारों को कीट पालन गृह बनाने के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें से 50 फीसदी धनराशि विभाग और मनरेगा योजना से मिलेगी। कीट गृह तैयार करने वाले काश्तकारों को रेशम कीट उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग ग्रामीणों को तकनीकी सहायता देने के साथ ही रेशम के विपणन की सुविधा भी उपलब्ध कराएगा। लमगड़ा ब्लॉक के उड्यूरा में 65 एकड़ क्षेत्र में दिसंबर में शहतूत के पौधे रोपने की योजना है।

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