फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Retired army officer mc Bhandari

सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मोहन भंडारी ने बताई कारगिल युद्ध की आंखों देखी

Tue, 26 Jul 2016 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)। Updated Tue, 26 Jul 2016 12:14 AM IST
विज्ञापन
Retired army officer mc Bhandari
रिटायर्ड सेना अधिकारी जेसी भंडारी - फोटो : अमर उजाला

रानीखेत (अल्मोड़ा)। 1999 का जुलाई महीना कभी नहीं भूलने वाला महीना है। मैं कारगिल युद्ध की गतिविधियों की जानकारी के लिए युद्ध स्थल गया हुआ था। मैंने देखा कि टाइगर हिल की चोटी पर भारत-पाकिस्तान की तरफ से हो रहे हवाई और जमीनी हमले में शहीद और घायल सैन्य अधिकारियों, जवानों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा था। जांबाजों का जज्बा और हौसला देखकर सिर गर्व से ऊंचा उठ गया। मन में संतोष हुआ कि ऐसे सैन्य अधिकारियों और जवानों के होते हुए भारत का कोई भी दुश्मन बाल बांका नहीं कर सकता।

विज्ञापन


सामरिक मामलों के विशेषज्ञ और कारगिल युद्ध को निर्देशित करने वाले सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मोहन चंद्र भंडारी को कारगिल युद्ध की एक-एक गतिविधि आज भी अच्छी तरह से याद है। भंडारी बताते हैं कि तब वह ब्रिगेडियर पद पर थे और युद्ध निर्देशन मंडल की कमान संभाल रहे थे। हर तीसरे दिन युद्ध की गतिविधियों का जायजा लेने कारगिल जाते थे। चार मई 1999 को चरवाहों ने सीमा पर कुछ संदिग्ध लोगों को देखने के बाद भारत ने युद्ध की कार्रवाई शुरू की।
विज्ञापन


अचानक शुरू हुई कार्रवाई के कारण भारतीय सेना के कुछ जांबाज शहीद हो गए थे, लेकिन इसके बाद भारतीय सेना पूरी रौ में आई और दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया। मुझे याद है जुलाई महीना। युद्ध के दौरान तोपों, हवाई हमलों को मैं साफ तौर से देख रहा था। युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों का हौसला और जज्बा देखते ही बन रहा था। शहीद और घायल जांबाजों की बहादुरी को देखा तो लगा कि इससे बड़ी देशसेवा और कुछ नहीं है। 11 जुलाई को भारतीय सेना ने लगभग दुश्मनों को निपटा दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी ले. जनरल तौकीर जिया से समझौते के लिए हम लोग अटारी गए थे, वहां वार्ता हुई, लेकिन पाकिस्तान ने फिर पीठ पर छुरा भौंका। भारतीय सेना ने फिर मुंहतोड़ जवाब दिया और 25 जुलाई को टाइगर हिल फतह कर लिया। 26 जुलाई को युद्ध विराम की घोषणा हुई थी। भारतीय सेना के हौसले और जज्बे के कारण ही इस दिन को शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। रानीखेत। भंडारी ने बताया कि कारगिल युद्ध हारने के बाद पाकिस्तानी सेना के ले. जनरल तौकीर जिया के कंधे तो झुके थे, लेकिन आंखों में प्रतिशोध की ज्वाला धधक रही थी। इसी प्रतिशोध की भावना को लेकर नियंत्रण रेखा पर आए दिन दुस्साहसिक गतिविधियां हो रही हैं।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed