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चिलियानौला में अंगद रावण संवाद ने मोहा दर्शकों का मन
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अल्मोड़ा के बाड़ेछीना में आयोजित रामलीला का दृश्य।
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। रामलीला कमेटी बाड़ेछीना की ओर से राइंका परिसर में मंचन जारी है। आठवें दिन सीता खोज, अंगद रावण संवाद, मेघनाद लक्ष्मण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, लक्ष्मण का मूर्च्छा से जागना आदि प्रसंग मंचित किए गए। अंगद-रावण संवाद आकर्षण का केंद्र रहा।
रावण दरबार में पहुंचने पर अंगद रावण से कहते हैं अंगद नाम बाली कर बेटा तो से कबहुं भयहुं नहीं भेटा रामदूत में सुन दश शीषा रावण में जानूं बल तोरा.. आदि। अंगद का संदेश सुनकर रावण क्रोधित हो गया और उसने श्रीराम से युद्ध की हुंकार भरते हुए अनुचरों से अंगद को उठाकर दरबार के बाहर फेंकने की आज्ञा दी।
अंगद अपना एक पैर जमीन पर जमाकर खड़े रहे। रावण के तमाम योद्धाओं ने अंगद का पैर जमीन से हटाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए। मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक कैलाश शर्मा थे।
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वहां पर समिति अध्यक्ष कमल बिष्ट, व्यवस्थापक बसंत तिलारा, खिलानंद भट्ट, धीरज कुमार, हेम तिवारी आदि थे। श्री राम का अभिनय भावेश तिलारा ने गौरव जोशी ने लक्ष्मण, शिवानी जोशी ने सीता, अंजली कौशल्या, हिमानी ने सुमित्रा, भानुप्रकाश तिलारा अंगद, गोपाल मेहरा रावण, जगदीश सुयाल मेघनाद, शुभम जोशी ने हनुमान का किरदार निभाया।
चिलियानौला में हुआ अंगद-रावण संवाद
रानीखेत/द्वाराहाट। चिलियानौला की रामलीला में अंगद रावण संवाद ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों के शानदार अभिनय ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। रावण की भूमिका में नीरज तिवारी का किरदार खूब सराहा गया। इससे पूर्व भाजपा नेता महेंद्र अधिकारी, छावनी परिषद रानीखेत के नामित सदस्य मोहन नेगी सहित तमाम लोगों ने रामलीला की शुरूआत की।
वहीं, द्वाराहाट के सूदूरवर्ती फल्द्वाड़ी मुसनौला की रामलीला जयभीड़ में जारी है। यहां लक्ष्मण शक्ति, हनुमान का संजीवनी बूटी लाना आदि दृश्यों का भावपूर्ण मंचन किया गया।
श्रीराम ने भरत को दिए खड़ाऊं
धरमघर/कांडा (बागेश्वर)। धरघर और कांडा में रामलीला जारी है। रामलीला में भरत के चित्रकूट पहुंचने, आदि प्रसंगों का मंचन किया गया। चित्रकूट से मंत्री सुमंत के बगैर राम, लक्ष्मण, सीता के वापस लौटने से दुखी राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। इससे पहले श्रवण कुमार नाटक का मंचन किया जाता है।
भरत और शत्रुघ्न ननिहाल से अयोध्या लौटते हैं। इसके बाद वे भगवान राम को मनाने चित्रकूट पहुंचते हैं। भगवान राम अयोध्या लौटने से मना कर देते हैं। भरत को खड़ाऊं देकर अयोध्या भेज देते हैं। दशरथ की भूमिका चेतन धर्मशक्तू, श्रवण कुमार की भूमिका भरत लसपाल, सुमंत की भूमिका पप्पू लाल वर्मा ने निभाई।
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रावण दरबार में पहुंचने पर अंगद रावण से कहते हैं अंगद नाम बाली कर बेटा तो से कबहुं भयहुं नहीं भेटा रामदूत में सुन दश शीषा रावण में जानूं बल तोरा.. आदि। अंगद का संदेश सुनकर रावण क्रोधित हो गया और उसने श्रीराम से युद्ध की हुंकार भरते हुए अनुचरों से अंगद को उठाकर दरबार के बाहर फेंकने की आज्ञा दी।
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अंगद अपना एक पैर जमीन पर जमाकर खड़े रहे। रावण के तमाम योद्धाओं ने अंगद का पैर जमीन से हटाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए। मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक कैलाश शर्मा थे।
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वहां पर समिति अध्यक्ष कमल बिष्ट, व्यवस्थापक बसंत तिलारा, खिलानंद भट्ट, धीरज कुमार, हेम तिवारी आदि थे। श्री राम का अभिनय भावेश तिलारा ने गौरव जोशी ने लक्ष्मण, शिवानी जोशी ने सीता, अंजली कौशल्या, हिमानी ने सुमित्रा, भानुप्रकाश तिलारा अंगद, गोपाल मेहरा रावण, जगदीश सुयाल मेघनाद, शुभम जोशी ने हनुमान का किरदार निभाया।
चिलियानौला में हुआ अंगद-रावण संवाद
रानीखेत/द्वाराहाट। चिलियानौला की रामलीला में अंगद रावण संवाद ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों के शानदार अभिनय ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। रावण की भूमिका में नीरज तिवारी का किरदार खूब सराहा गया। इससे पूर्व भाजपा नेता महेंद्र अधिकारी, छावनी परिषद रानीखेत के नामित सदस्य मोहन नेगी सहित तमाम लोगों ने रामलीला की शुरूआत की।
वहीं, द्वाराहाट के सूदूरवर्ती फल्द्वाड़ी मुसनौला की रामलीला जयभीड़ में जारी है। यहां लक्ष्मण शक्ति, हनुमान का संजीवनी बूटी लाना आदि दृश्यों का भावपूर्ण मंचन किया गया।
श्रीराम ने भरत को दिए खड़ाऊं
धरमघर/कांडा (बागेश्वर)। धरघर और कांडा में रामलीला जारी है। रामलीला में भरत के चित्रकूट पहुंचने, आदि प्रसंगों का मंचन किया गया। चित्रकूट से मंत्री सुमंत के बगैर राम, लक्ष्मण, सीता के वापस लौटने से दुखी राजा दशरथ प्राण त्याग देते हैं। इससे पहले श्रवण कुमार नाटक का मंचन किया जाता है।
भरत और शत्रुघ्न ननिहाल से अयोध्या लौटते हैं। इसके बाद वे भगवान राम को मनाने चित्रकूट पहुंचते हैं। भगवान राम अयोध्या लौटने से मना कर देते हैं। भरत को खड़ाऊं देकर अयोध्या भेज देते हैं। दशरथ की भूमिका चेतन धर्मशक्तू, श्रवण कुमार की भूमिका भरत लसपाल, सुमंत की भूमिका पप्पू लाल वर्मा ने निभाई।