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मेलाडुंगरी की अर्चना भंडारी और गांव लड़कियों ने वेस्ट मेटीरियल से उत्तराखंड की लोककला

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2020 10:54 PM IST
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Rakhi Making in Meladungri Garur
मेलाडुंगरी की लड़कियों द्वारा बनाई गयी फैंशी वस्तुवें - फोटो : GARUD
गरुड़ (बागेश्वर)। विकासखंड के मेलाडुंगरी की बहनों ने खराब हो चुकी दैनिक उपभोक्ता सामग्री का सदुपयोग कर राखी समेत कई सजावटी आइटम बनाए हैं। इनकी आसपास के गांवों में भी खासी मांग है।
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इसके लिए जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) की ओर से मेलाडुंगरी गांव में महिलाओं को दस्तकारी और परंपरागत हस्तशिल्प कला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसकी अवधि ढाई माह है। इसके लिए स्थानीय ग्रामीण अर्चना भंडारी को मास्टर ट्रेनर बनाया गया है। अर्चना ने बताया कि उन्हें जेएसएस से स्वरोजगार की प्रेरणा मिली। उन्होंने ग्रामीणों के सहयोग से पुराने अखबार आदि पुरानी वस्तुएं जुटाईं। वह कलावे और ऊन से राखी, कांच की खाली बोतल, बेकार टूथब्रस से पैन स्टैंड, फूल, फ्लॉवर पॉट, ऐपण फ्रेम, राखी, बैंगिल बॉक्स, मांगलिक चौकी बनाकर गांव की लड़कियों को भी सिखा रही हैं। जेएसएस की चंदू नेगी ने बताया कि इन वस्तुओं पर शानदार हस्तशिल्प समेत सुंदर पेंटिंग भी की गई है। संस्थान के नरेंद्र खेतवाल ने बताया कि इस शिविर में अयारतोली, कज्यूली, भिलकोट आदि गांवों की लड़कियां भी रोज प्रशिक्षण लेने आ रही हैं। ग्राम प्रधान मेलाडुंगरी कौशल्या भंडारी, बीडीसी सदस्य नीमा भंडारी, पूर्व प्रधान बलवंत भंडारी ने बताया कि गांव में बनाई गयी राखी खरीदने के लिए दूरदराज से भी ग्रामीण आ रहे हैं। मास्टर ट्रेनर अर्चना को 2000 से अधिक राखियों की मांग मिल चुकी है। यह राखी भी प्रशिक्षु युवतियों से ही बनवाई जा रही है।
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