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बहे ना सुहागन की आंखों का काजल महफूज रखना..

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Feb 2021 11:56 PM IST
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poem evening in rachna festival
अल्मोड़ा में हुए कवि सम्मेलन में एक रचनाकार को सम्मानित करते मुख्य अतिथि। - फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। मोहन उप्रेती लोक संस्कृति कला, विज्ञान शोध समिति की ओर से आयोजित सात दिवसीय रचना दिवस महोत्सव के तहत राजकीय संग्रहालय सभागार में हुए हिंदी कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने विभिन्न मुद्दों पर कविताएं सुनाईं। विनीता जोशी ने ‘बहे ना सुहागन की आंखों का काजल महफूज रखना हर एक मां का आंचल’ कविता पेश की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि त्रिभुवन गिरी महाराज, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवि और एसएसजे परिसर के पूर्व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. सैयद अली हामिद ने सम्मेलन का शुभारंभ किया।
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शगु़फ्ता कशिश ने ‘मेरे हर शब्द का सुनहरा ख्वाब..., चंद्रा उप्रेती ने ‘कितना प्यारा राज्य हमारा उत्तराखंड.., पवनेश ठकुराठी ने ‘तेरी याद में रह-रह निस दिन अकुलाता है ओ प्रवासी पंछी तुझे गांव बुलाता है, त्रिवेंद्र जोशी ने ‘आपदा के कहर से देवभूमि सिहर गई सोचिए प्रकृति एक बार क्या इशारा कर गई..., दीपांशु कुंवर ने ‘टोपी वाले इंसानों से डर लगता है देश में बैठे गद्दारों से डर लगता है, मयंक कुमार ने ‘मैं भोर का उगता सूरज.., रोहित केसरवानी ने ‘प्रकृति का तांडव होता है सर्वलोक तब रोता है, विवेक बादल बाजपुरी ने ‘वही भोले की नगरी है... कविता प्रस्तुत की। इसके अलावा ललित तुलेरा, मनीष पंत, मीना पांडे, किरन पंत, नीरज पंत, नीरज बवाड़ी ने काव्य पाठ किया। सभी रचनाकारों को स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। इधर जीजीआईसी में आयोजित दो दिवसीय संस्कार गीत कार्यशाला के समापन पर अध्यक्ष हेमंत जोशी ने प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए।
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